निर्णायक मोड़ पर उमा भारती का राजनीतिक भविष्य और मध्य प्रदेश में शराबबंदी आंदोलन

भोपाल. मध्य प्रदेश में शराबबंदी सामाजिक मुद्दे से राजनीतिक मसले की ओर से खिसकता दिखाई दे रहा है। इस मुद्दे पर लगातार अपनी ही सरकार को घेरती रहीं पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती अब भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के सामने भी पहुंच गई है। रक्षाबंधन से महिलाओं के साथ सड़क पर उतर कर शराबबंदी के लिए आंदोलन की उनकी घोषणा के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। इन घटनाक्रमों को राजनीतिक दबाव के तौर पर देखने वाले विश्लेषक भी उमा के रूख को आखिरी दांव मान रहे हैं। मना जा रहा है कि शराबबंदी आंदोलन की सफलता उमा भारती के राजनीतिक भविष्य के साथ जुड़ी है। इसके सियासी जोखिम को भी नकारा नहीं जा सकता। दरअसल उमा भारती शराबबंदी आंदोलन पर अपने इरादों के बीच सत्ता और संगठन से मिले दर्द या कहें दूरी को छुपा नहीं पा रही है। केंद्र सरकार और संगठन में उनके कद को लेकर हुए फैसले का दर्द छलक उठा है।

उमा छह साल पुराना वाकया बताती हैं कि उन्हें गंगा सफाई मंत्रालय से क्यों हटाया गया था। उल्लेखनीय है कि पहले वह राष्ट्रीय उपाध्यक्ष थीं, लेकिन नई टीम में जगह नहीं मिली। चर्चा उप्र में राज्यपाल बनाने की भी थी, लेकिन मामला आगे ही नहीं बढ़ा। उन्होंने 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन 2024 के लिए चुनाव लड़ने का एलान कर चुकी हैं।