जनगणना पर सरकार का बड़ा बयान, कहा-हर नागरिक सवालों का जवाब देने के लिए बाध्य
देश में 2021 में ही जनगणना होनी थी लेकिन कोविड के चलते जनगणना नहीं कराई जा सकी. ऐसे में इस साल जनगणना होने की पूरी उम्मीद है. इस बीच केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संसद में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा है कि देश का हर नागरिक जनगणना में पूछे गए सवालों का जवाब देने के लिए बाध्य है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनसंख्या पंजीकरण (NPR) पर सुचारू रूप से काम चलाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं. नित्यानंद राय ने सदन में एक सवाल के लिखित उत्तर में यह बात कही.
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा, ‘राज्य सरकारों ने जनगणना अधिनियम, 1948 के प्रावधानों के तहत जनगणना कार्य में सहायता या पर्यवेक्षण के लिए जनगणना अधिकारियों की नियुक्ति की है.’ उन्होंने कहा कि देश का हर नागरिक कानूनी रूप से अपने ज्ञान या विवेक के अनुसार जनगणना के प्रश्नों का उत्तर देने के लिए बाध्य है.
नित्यानंद राय ने कहा, ‘इस संबंध में सभी आवश्यक कदम राज्य सरकारों की मदद से उठाए जा रहे हैं ताकि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर और जनगणना के काम को सुचारू रूप से किया जा सके. राष्ट्रीय जनगणना पंजीकरण या एनपीआर में घरों की सूची को दर्ज करने का समय 1 अप्रैल 2020 से 30 सितंबर 2020 के बीच ही था, लेकिन कोविड-19 के कारण ऐसा हो नहीं सका. इसके साथ ही 1 मार्च 2021 से जनगणना करने का समय निर्धारित था. वहीं जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 1 अक्टूबर 2020 से ही जनगणनना होनी थी, लेकिन सब कोविड के कारण नहीं हो सकी.’ हालांकि सरकार ने अभी तक जनगणना के लिए अगली तिथि की घोषणा नहीं की है.
मंत्री का बयान महत्वपूर्ण
जनगणना को लेकर दो साल पहले एनआरसी आंदोलन के समय हंगामा हुआ था. राष्ट्रीय नागरिकता कानून को निरस्त किए जाने को लेकर आंदोलनरत कुछ लोगों ने कहा था कि अगर एनआरसी को रद्द नहीं किया गया तो वह जनगणना के सवालों के जवाब नहीं देंगे. इसे लेकर उस समय देश में काफी हंगामा हुआ था. इस संबंध में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री का बयान बेहद महत्वपूर्ण है. क्योंकि अब यह साफ हो गया कि जनगणना अधिनियम, 1948 के प्रावधानों के तहत देश का हर नागरिक जनगणना में पूछे गए सवालों का जवाब देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य हैं.