DRDE ने बनाया टी-90 टैंक के लिये केमीकल एजेंट डिटेक्टर, रासायनिक हमलों से बच सकेंगे सेना के जवान
ग्वालियर. DRDE ग्वालियर ने युद्ध के दौरान जंगी टैंकों में सवार सैनिकों को केमीकल हमले से बचने के लिये अलर्ट मिलेगा और वह समय रहते इससे बच सकेंगे। ग्वालियर की DRDE ने ऐसा केमीकल एजेंट डिटेक्टर (सेंसर) तैयार किया है और जो इसमें लगेगा और सैनिकों को रासायनिक हमले से बचायेगा और इसका उपयोग भारत के टी‘-90 टैंक में किया जायेगा। वहीं, दूसरी ओर DRDE को महारापुरा में मिली 140 एकड़ जमीन पर सेंटर फॉर रिसर्च ऑन बायोलॉजिकल डिफेंस (CARBD) का निर्माण किया जायेगा। आपको बता दें कि यह देश की एक मात्र प्रयोगशाला होगी। जिसमें बीएसएल-4 (बायो सेफ्टी लेवल) की सुविधा होगी। इसमें किसी भी नयी बीमारी को डिटेक्ट कर निदान किया जा सकेगा। यह जानकारी रक्षा उत्पाद प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह में DRDE के निदेशक डॉ. मनमोहन परीदा ने की।
क्या होता है बीएसएल-4
बायो सेफ्टी लेवल (बीएसएल-4) में रिसर्च करने वाले हर साइंटिस्ट विशेष सूट पहनता है। अगर गलतीवश बायोलॉजिकल कुछ गड़बड़ी होती भी है तो पास वाले व्यक्ति को वो चीज इफेक्ट नहीं कर पाएगी। इस तरह आसपास वैज्ञानिक सुरक्षित रहेंगे। इसी तरह बीएसएल-3 में अंदर की कोई भी चीज हवा में बाहर नहीं जा सकती है। यानी बाहर के व्यक्तियों को किसी भी तरह का खतरा नहीं है। डॉ. परीदा ने बताया कि कि हाल ही में इजिप्ट में डीआरडीई में बने 3 से 4 खास उत्पादों का प्रदर्शन किया था। इसमें एनबीसी सूट काफी पसंद किया गया है। भविष्य में यह बाहर भी सप्लाई किया जाएगा।
बाहर के देशों के साथ रिसर्च को बढ़ावा
डॉ. मनमोहन परीदा ने कहा कि रक्षा मंत्रालय और भारत सरकार रक्षा उत्पादों पर रिसर्च को बढ़ावा दे रही है। अभी इंडो-इजरायल और इंडो-रशिया कोलेबोरेशन में कई सारे प्रोजेक्ट पर काम किया जाना है। आने वाले समय में निश्चित ही इसका फायदा भारत सहित इन देशों को होगा।
जीनोम सिक्वेंसिंग पर चल रहा है काम
पत्रकारों से चर्चा में डॉ. परीदा ने कहा कि जीनोम सीक्वेसिंग पर भी काम किया जा रहा है। निकट भविष्य में इसकी शुरुआत भी ग्वालियर में हो सकती है। अभी इंटरनली इस पर काम किया जा रहा है। ये सारी चीजें आत्मनिर्भर भारत की कड़ी में हैं। जो केमिकल एजेंट डिटेक्टर बनाया गया है, उसे रक्षा मंत्री ने एलएंडटी डिफेंस को दे दिया है।