इलाहाबाद HC का अहम फैसला... दुष्कर्म पीड़िता के बच्चे का पिता कौन, यह जानने के लिए DNA Test को मजबूर नहीं कर सकते

प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में जस्टिस संगीता चंद्रा ने एक याचिका पर अहम फैसला दिया. उन्होंने दुष्कर्म से जुड़ी एक याचिका पर कहा कि कि दुष्कर्म पीड़िता को घटना के बाद हुई संतान का पितृत्व तय करने के लिए डीएनए टेस्ट के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है. इस आदेश के साथ ही हाईकोर्ट लखनऊ बेंच ने पॉक्सो कोर्ट के दुष्कर्म पीड़िता के संतान का डीएनए टेस्ट का आदेश खारिज़ कर दिया.

पीड़िता की मां ने दायर की थी याचिका
वर्ष 2017 में सुल्तानपुर की देहात कोतवाली के इस मामले में 14 साल की बच्ची से दुष्कर्म की एफआईआर दर्ज हुई थी. पीड़िता की मां की ओर से दर्ज एफआईआर के अनुसार उसकी नाबालिग बेटी से आरोपी ने दुष्कर्म किया था. इस कारण उसकी बेटी गर्भवती हो गई थी. विवेचना के बाद पुलिस ने मामले में चार्जशीट दाखिल की थी.

ट्रायल के दौरान दिया बच्चे को जन्म

मामले के ट्रायल के दौरान पीड़िता ने बच्चे को जन्म दिया था. ट्रायल के दौरान आरोपी ने पैदा हुए बच्चे का डीएनए टेस्ट कराने के लिए जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में याचिका दायर की थी. 25 मार्च 2021 को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने ये खारिज़ कर दी थी. जिसके बाद आरोपी ने पॉक्सो कोर्ट में अपील दाखिल की थी, जिस पर 25 जून 2021 को पॉक्सो कोर्ट ने बच्चे का डीएनए टेस्ट कराने का आदेश दिया था.

पीड़िता की मां ने पॉक्सो कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में पॉक्सो कोर्ट के आदेश को ख़ारिज करते हुए कहा कि पॉक्सो कोर्ट ने ये नहीं देखा कि डीएनए टेस्ट का आदेश देने से कहीं बच्चे बच्चे के नाजायज़ होने या मां के चरित्रहीन होने का खतरा तो नहीं हो जाएगा.