अमृतसर से शब्द चौकी लेकर श्रद्धालुओं जत्थ दाताबंदी छोड़ गुरूद्वारा पर पहुंचा, रोशनी से नहाया गुरूद्वारा

ग्वालियर. सिखें का धार्मिक तीर्थ स्थान किले स्थित दाताबंदी छोड़ गुरूद्वारे पर दाताबंदी छोड़ का 400वां वर्ष का 3 दिवसीय महोत्सव सोमवार से प्रारंभ होगा। महोत्सव में देश-विदेश से सिख संगत शामिल होने ग्वालियर आ रही है। महोत्सव में शामिल होने अमृतसर से शब्द चौकी लेकर आ रहे 100 तीर्थ यात्रियों के जत्थे का रविवार को पुरानी छावनी गुरूद्वार पर स्वागत किया गया। जिसमें एक 85 वर्ष की महिला मी जत्थे शामिल थी जो नीचे ऊपर पैदल चल कर पहुंची।

जत्थे का जगह-जगह स्वागत किया गया और आतिशबाजी भी की गयी और जत्थे में शामिल तीर्थ यात्रियों ने गुरूद्वारे पर मत्थ टैका और गुरूद्वारा दाताबंदी छोड़ का 400वां महोत्सव श्रद्धाभाव से मनाया जायेगा। महोत्सव के लिये अमृतसर से 6 सितम्बर से शब्द चौकी लेकर 100 श्रद्धालुओं का जत्थ निकला था जो रविवार की शाम को पुरानी छावनी से होता गुरूद्वारा पहुंच गया।

गुरु हरगोविंद साहिब के जीवन चरित्र पर आधारित चित्र प्रदर्शनी का विमोचन

आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर दाता बंदी छोड़ दिवस के 400 वर्ष पूर्ण होने पर पंजाबी साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद मध्य प्रदेश शासन संस्कृति विभाग भोपाल द्वारा श्री गुरु हरगोबिंद साहिब के 400 साल शताब्दी वर्ष के मौके पर दाता बंदीछोड़ दिवस 4, 5 एवं 6 अक्टूबरको गुरु हरगोबिंद साहिब के जीवन पर केंद्रित चित्र प्रदर्शनी एवं पुस्तक का विमोचन किया जा रहा है । इस विमोचन का कार्यक्रम 4 अक्टूबर को शाम 3 बजे सांसद विवेक शेजवलकर] राजा मानसिंह तोमर विश्वविद्यालय के कुलपति साहित्य कुमार नाहर, वरिष्ठ कवि हरभजन सिंह देओल, सदस्य संचालन समिति आईजी एनसीए संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार, भाजपा जिला अध्यक्ष कमल माखीजानी, पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता वरिष्ठ कवि एवं संत उपस्थित रहेंगे। यह जानकारी मीडिया प्रभारी श्रीमति नीरू सिंह ने दी।

सोमवार को होगा सर्वधर्म सम्मेलन

3 दिवसीय दाताबंदी छोड़ महोत्सव का शुभारंभ 4 अक्टूबर से प्रारंभ होगा। पहले दिन सोमवार की सुबह 9 से 12 बजे तक बच्चों का क्विज प्रतियोगिता होगी। इसमें पंजाब और मध्यप्रदेश के स्कूलों के 100 बच्चे भाग लेंगे और इसके बाद सहज पाठ कर रहे करीब 8 हजार श्रद्धालुओं को भोग डालेंगे। पहले दिन सर्वधर्म सम्मेलन और कवि दरबार का भी आयोजन किया जायेगा। इस मौके यहां आने 10 हजार श्रद्धालुओं को सरोपे भेंट किये जायेंगे। यह सरोपे बनाने का काम महिला श्रद्धालुओं के द्वारा किया जा रहा है।