मप्र में अप्रत्यक्ष प्रणाली से होंगे निकाय चुनाव, पार्षद ही चुनेंगे महापौर-अध्यक्ष, सितंबर-अक्टूबर में चुनाव कराने की तैयारी
मध्य प्रदेश में नगरीय निकायों के चुनाव उसी सिस्टम से होंगे जैसा कमलनाथ चाहते थे। अब महापौर और अध्यक्ष के चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से होंगे। शिवराज सरकार ने राज्य निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर कहा है कि नगरीय निकायों के चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से ही कराएं, यानी नगर निगमों में महापौर और नगर पालिकाओं के अध्यक्षों को पार्षद चुनेंगे। दिग्विजय सिंह के कार्यकाल के वक्त भी महापौर और निकाय अध्यक्ष ऐसे ही चुने जाते थे। राज्य निर्वाचन आयुक्त बीपी सिंह ने बताया कि नगरीय निकाय चुनाव पहले होंगे इसके बाद पंचायत चुनाव कराए जाएंगे। कोरोना की तीसरी लहर नहीं आती है या फिर कमजोर होती है तो सितंबर-अक्टूबर में चुनाव करा लिए जाएंगे इसके बाद पंचायत चुनाव कराने की तैयारी है।
मंत्रालय के जानकारों ने बताया कि सरकारने नगरीय निकाय के चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से कराने का फेसला लिया है, इसको लेकर नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने राज्य चुनाव आयोग को पत्र भेज दिया है। आयोग ने इस पत्र के आधार पर चुनाव प्रक्रिया को लेकर एक बैठक कर ली है। मप्र में 2015 तक महापौर-अध्यक्ष के चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से होते रहे है लेकिन तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने अप्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराने का फेसला किया था।
347 नगरीय निकायों में होगा चुनाव
बैठक में जानकारी दी कि प्रदेश में कुल 407 नगरीय निकाय है इनमें से 347 में आम निर्वाचन कराये जाना है। दो चरण में मतदान होगा, प्रथम चरण में 155 और दूसरे चरण में 192 नगरीय निकायों में मतदान कराया जायेगा। महापौर/अध्यक्ष का निर्वाचन अप्रत्यक्ष प्रणाली से होगा। इन 347 नगरीय निकायों में सभी 16 नगर निगम शामिल है। वहीं अभी 60 नगरीय निकायों का कार्यकाल बाकी है।