जूनियर डॉक्टर की हड़ताल तीसरे दिन भी जारी, OPD और इमरजेंसी सेवा के बाद ब्लैक फंगस का इलाज भी ठप

मध्य प्रदेश में जूनियर डॉक्टर की हड़ताल (Junior Doctor's Strike) तीसरा दिन भी जारी है. कल जूनियर डॉक्टरों ने कोरोना के साथ ब्लैक फंगस (Black fungus) इलाज बंद कर दिया. इससे पहले जनरल ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं बंद कर दी थीं. अब इस हड़ताल को मेडिकल टीचर्स का भी समर्थन मिला है. इस बीच हड़ताल के मद्देनजर गांधी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने डॉक्टरों को नोटिस जारी कर एक्शन लेने की बात कही है.

वहीं, जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने 25 दिन पहले 1 दिन की हड़ताल के दौरान चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग (Vishvas Sarang) और स्वास्थ विभाग के अधिकारियों से मुलाकात की थी. इस मुलाकात के दौरान उन्हें आश्वासन दिया गया था कि उनकी चार मांगों को सरकार मान लेगी. इस आश्वासन के बावजूद भी सरकार की तरफ से उनकी मांगों को लेकर कोई भी लिखित में आदेश जारी नहीं किया गया है. 31 मई तक का अल्टीमेटम सरकार को जूनियर डॉक्टरों ने दिया था. वह इस बात पर अड़े थे कि सरकार अब उन्हें लिखित में मांगों का आदेश जारी करें, लेकिन पिछले 3 दिनों से चिकित्सा शिक्षा मंत्री हड़ताल को गलत और डॉक्टर की हठधर्मिता करार दे रहे हैं. हालांकि स्वास्थ्य विभाग की तरफ से अभी तक कोई लिखित में आदेश जारी नहीं किया गया. सिर्फ डॉक्टरों को आश्वासन दिया गया. यही कारण है कि यह हड़ताल तीसरे दिन भी जारी है.

टीचर्स का मिला समर्थन, GMC का एक्शन

इधर जूनियर डॉक्टरों ने कोरोना के साथ ब्लैक फंगस का इलाज भी बंद कर दिया है. इससे आम मरीजों के साथ कोरोना और ब्लैक फंगस को मरीजों को दिक्कत हो रही है. हड़ताल के मद्देनजर गांधी मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है. जीएमसी प्रबंधन ने हड़ताल पर गए डॉक्टरों की सूची मैन गेट पर चस्पा कर दी है. उनको चेतावनी दी है कि कार्य स्थल पर उपस्थित नहीं होने पर संबंधित डॉक्टर्स के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनका रजिस्ट्रेशन निरस्त किया जायेगा. प्रदेश के मेडिकल कॉलेज के करीबन 2500 जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर हैं. अब उनकी मांगों को लेकर और हड़ताल का मेडिकल के टीचर ने समर्थन किया है. लगातार इस हड़ताल को मेडिकल फील्ड से जुड़े संगठनों का समर्थन मिल रहा है.हठधर्मिता कर रहे जूनियर डॉक्टर : विश्वास सारंग

विश्वास सारंग ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस समय समाज को सबसे ज्यादा डॉक्टरों की जरूरत है उस समय जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर जा रहे हैं. सरकार ने उनकी मांगें मानी है और उन्हें प्रतिमाह 60 हजार रुपये से लेकर 70 हजार तक का स्टाइपेंड दिया जा रहा है. उनकी 6 मांगों में से 4 मांगों को मान भी लिया गया है, लेकिन उसके बाद भी हठधर्मिता कर रहे हैं. सारंग ने कहा कि मैंने निवेदन किया है कि वह जल्द से जल्द काम पर वापस आएं और यदि नहीं आते हैं तो मजबूरन हमें कार्रवाई करनी पड़ेगी. उन्होंने कहा मरीजों के साथ यदि नाइंसाफी होगी तो यह सहन करना मुश्किल रहेगा.

यह हैं 6 मांगें

मानदेय में बढ़ोतरी कर इसे 55 हजार, 57 हजार, 59 हजार से बढ़ाकर क्रमश: 68200, 70680, और 73160 किया जाए.

मानदेय में हर साल छह फीसदी की बढ़ोतरी की जाए.

कोविड ड्यूटी को एक साल की अनिवार्य ग्रामीण सेवा मानकर बॉन्‍ड से मुक्त किया जाए.

कोविड में काम करने वाले डॉक्टरों व उनके स्वजन के लिए अस्पताल में इलाज की अलग व्यवस्था हो.

कोविड ड्यूटी में काम करने वाले डॉक्टरों को सरकारी नियुक्ति में 10 फीसदी अतिरिक्त अंक दिए जाएं.