भोपाल में एक दिन में जलीं 118 लाशें, सच्चाई बयां कर रहे श्मशान और कब्रिस्तान
राजधानी में कोरोना संक्रमण की मौत ने रफ्तार पकड़ ली है. मौत का आंकड़ा दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है. आंकड़ों की सच्चाई शहर के मुख्य विश्राम घाट और कब्रिस्तान बयां कर रहे हैं. जबकि सरकारी रिकॉर्ड में मौत ना के बराबर हो रही है.
16 अप्रैल को एक दिन में 118 शवों का कोरोना प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार किया गया. यह अभी तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है. इसने पिछले साल और दूसरी लहर में अभी तक मौत के सभी रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है. इस मौत के आंकड़े से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोरोना संक्रमण कितनी तेजी से फेल रहा है. हालांकि सरकारी आंकड़ों में सिर्फ छह लोगों की मौत का जिक्र है. शहर में 15 अप्रैल को 112 शवों का कोरोना प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार हुआ था.
सबसे ज्यादा अंतिम संस्कार भदभदा विश्राम घाट पर
शहर के भदभदा विश्राम घाट पर सबसे ज्यादा अंतिम संस्कार किए जा रहे हैं. दिन-ब-दिन मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है. 16 अप्रैल को भदभदा विश्रामघाट में 69, सुभाष नगर में 40 शवों का कोरोना प्रोटोकॉल से अंतिम संस्कार हुआ. जबकि, 9 लोगों को कब्रिस्तान में दफनाया गया. शहर में 48 लोगों की सामान्य मौत हुई.
मौत के आंकड़ों पर सियासत जारी
कोरोना से होने वाली मौत के आंकड़ों को लेकर चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि सरकार किसी भी तरीके के आंकड़ों को छुपाने का काम नहीं कर रही है. जिन लोगों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है उन्हें संदिग्ध मरीज माना गया है.
वहीं प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा कि सरकार मौत के आंकड़ों में हेराफेरी कर रही है. वह कोरोना को लेकर गंभीर नहीं है. उन्होंने कहा कि सरकार अब कोरोना से नहीं बल्कि मौत के आंकड़ों से लड़ाई लड़ रही है.