बंगाल में भाजपा में बगावत, अमित शाह ने प्रदेशाध्यक्ष को दिल्ली बुलाया, मप्र के स्वास्थ्य मंत्री को कई बातें सुनाई

पश्चिम बंगाल. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 200 सीटें जीतने का दावा करने वाली भाजपा में पार्टी के भीतर ही बगावत शुरू हो गई है। कैंडीडेट्स की दूसरी सूची जारी होने के बाद कोलकाता समेत पूरे प्रदेश में पार्टी के कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन कर रहे है और बड़े नेताओं को घेर रहे है। कई जगह पत्थरबाजी और चप्पल फेंकने जैसी घटनाएं भी हुईं। विरोध को काबू में करने के लिए गृहमंत्री अमित शाह ने रात अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष और अन्य नेताओं के साथ बैठक की थी लेकिन भाजपा के हेस्टिंग स्थित कार्यालय के सामने कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया इसके बाद केंद्रीय नेतृत्व ने दिलीप घोष, मुकुल रॉय सहित अन्य नेताओं को देर रात दिल्ली बुला लिया।

सांसदों व केंद्रीय मंत्रियों को टिकट देने पर विरोध

भाजपा ने रविवार को बंगाल विधानसभा चुनाव के तीसरे और चौथे चरण के लिए कैंडीडेट्स के नाम घोषित किए थे। तीसरे चरण के लिए 27 और चौथे चरण के लिए 38 कैंडीडेट्स अनाउंस किए थे इसमें केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो सहित तीन मौजूदा सांसदों लॉकेट चटर्जी, स्वपन दासगुप्ता और निशिश प्रमाणिक को मैदा में उतारा गया है। सांसदों और मंत्रियों को टिकट देने के बाद से ही राजनीतिक हलकों में ये सवाल खड़े हो रहे है कि पार्टी 200 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा कर रही है उसे अपने मौजूदा सांसदों और केंद्रीय मंत्री को चुनाव में उतारना पड़ रहा है इनके बीच स्वपन दासगुप्ता को राज्यसभा से इस्तीफा देना पड़ा क्योंकि तृणमूल सांसद महुला मोइत्रा ने उनकी उम्मीदवारी पर तकनीकी सवाल खड़े किए थे। सांसदों और मंत्रियों को टिकट मिलने के चलते जिन नेताओं को साइडलाइन किया गया है वे भी कार्यकर्ताओं के साथ खुलकर विरोध पर उतर आए है।

सुसाइड की कोशिश हुई

भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदेशभर में अलग-अलग स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किया। हुगली जिले सहित कोलकाता के हेस्टिंग स्थित भाजपा कार्यालय में जमकर हंगामा किया गया। कार्यकर्ताओं ने यह आरोप भी लगाए कि टीएमसी से आने वाले 89 साल के रबींद्रनाथ भट्टाचार्य जैसे दलबदलू नेताओं को टिकट दे दिया गया और जो कार्यकर्ता भाजपा के लिए खून-पसीना बहा रहे है उन्हें दरकिनार कर दिया गया। भट्टाचार्य को टिकट देने के विरोध में पार्टी के स्थानीय नेता संजय पांडे ने अपने समर्थकों के साथ विरोध किया, उन्होंने मप्र के स्वास्थ्य मंत्री का घेराव भी कर लिया था और उन्हें कई बातें सुनाई। वहीं हुगली जिले के ही निरूपम भट्टाचार्य ने रेलवे ट्रैक पर सुसाइड की कोशिश की हालांकि बाद में उन्हें किसी तरह मना लिया गया।