अटेर के लोग जान जोखिम में डालकर कर रहे नदी पार, लालच 35 किमी दूरी कम होगी

ग्वालियर. जनपद पंचायत यद्वारा नाव का ठेका निरस्त करने और नारायणदास कंस्ट्रक्शन कम्पनी द्वारा चम्बल नदी के ऊपर बनाये गये अस्थाई पुल को बन्द करने की वजह से जान जोखिम में डालकर लोग पैदल चम्बल नदी पार कर रहे हैं। चम्बल नदी में नाव नहीं चलने और अस्थाईपुल के बन्द होने की वजह से भिण्ड से उदी मोड़ होकर 35 किमी का चक्कर लगाकर आगरा पड़ रहा है। उदी मोड के रास्ते से आगरा जाने पर किराया भी ज्यादा लगता है नदी पर नाव नहीं चलने और अस्थाई पुल बन्द होने के पीछे मुख्य वजह यूपी वन विभाग से अनुमति नहीं मिलना बताया जा रहा है।

35 किमी दूरी हो जाती है कम

भिंड से उदी होते आगरा 110 किमी है। उदी का रास्ता खराब होने के कारण इसे तय करने में तीन घंटे का समय लगता है। यदि चंबल नदी में अटेर-जैतपुर घाट पर अस्थाई पुल फिर से चालू होता है तो इसकी दूरी करीब 35 किलो मीटर कम हो जाती है। इस संबंध में अटेर एसडीएम उदय सिंह सिकरवार का कहना है कि यूपी वन विभाग द्वारा चंबल नदी के अटेर जैतपुर नाव घाट पर नाव संचालन की अनुमति नहीं देने के कारण नाव संचालन का ठेका जनपद पंचायत को निरस्त करना पड़ा है।

नदी पर स्थाई पुल बना रही नारायणदास कंस्ट्रक्शन कंपनी

गौरतलब है कि दिसंबर 2020 में जनपद पंचायत द्वारा चंबल नदी में नाव चलाने का ठेका किया गया था, लेकिन यूपी वन विभाग ने इसकी अनुमति नहीं दो जनपद पंचायत ने ठेका निरस्त कर दिया। जिसके बाद नदी पर स्थाई पुल बना रही नारायणदास कंस्ट्रक्शन कंपनी ने नदी के ऊपर एक अस्थाई पुल बनाया। जिससे लोग एक तरफ से दूसरी तरफ पुल के ऊपर होते हुए पहुंच रहे थे। लेकिन कुछ दिन पहले कंपनी ने पुल को बंद कर दिया।