बैसली डैम की दुर्दशा 80 हजार लोगों की प्यास बुझाने वाला डैम रीता, तड़पकर मर गईं हजारों मछलियां
गोहद नगर के 80 हजार लोगों की प्यास बुझाने वाला बैसली डैम मार्च माह में ही पूरी तरह से सूख चुका है। नगर के लोग पानी के लिए परेशान हो रहे हैं। डैम में पानी न होने से मछलियों, कछुओं और अन्य जलीय जीवों की मौत हो रही है। मछलियां बिना पानी के तड़प रही हैं। गोहद में बैसली नदी पर वर्ष 1919 में सिंधिया स्टेट के समय डैम बनाया गया था।
वर्ष 1966 में इसका दायरा बढ़ाया गया। यह 1070 हेक्टेयर में फैला हुआ है।15 साल पहले तक डैम की क्षमता 521 फीट थी, हाईकोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार ओवरफ्लो की श्रेणी में आता था। कोर्ट के निर्देश के बाद बैसली बांध की क्षमता घटाकर 508 फीट कर दी गई। वर्तमान में डैम में नाममात्र का पानी बचा है, वह भी कीचड़युक्त। जिसकी वजह से मछलियां मर रही हैं।
रोज सप्लाई किया जाता था एक एमएलडी पानी
जब बैसली डैम के सूखने से पहले नपा द्वारा नगर में रोजाना एक एमएलडी पानी सप्लाई किया जाता था, लेकिन अब लोगों को पानी की एक बूंद भी नहीं मिल रही है। इसके अलावा डैम के पास नपा के दो स्कीम बोर हैं जो जलस्तर गिरने से पानी छोड़ चुके हैं।
पानी नहीं होने से जलीय जीवों की हो रही है मौत
डैम में पानी नहीं होने से मछलियों, कछुआ सहित अन्य जीवों की भी मौत हो रही है। अपनी जान बचाने के लिए जलीय जीव डैम के अंदर गड्ढों में मौजूद कीचड़ युक्त पानी में शरण लिए हुए हैं। कीचड़ में ऑक्सीजन नहीं होने से मछलियां तड़प-तड़पकर मर रही हैं।