डाबर और पतंजलि ग्वालियर अंचल में यूनिट लगाने पर सहमत, किसानों को दिया कंपनियों से जुड़ने का ऑफर\
डाबर और पतंजलि जैसी कंपनियों ने ग्वालियर-चंबल अंचल में फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने में रुचि दिखाई है। इन कंपनियों को शहद, आलू, टमाटर और अमरूद से उम्मीद है। कंपनियों ने किसानों को सीधे उनसे जुड़ने को कहा है। ताकि उनके उत्पाद खरीदे जा सकें। शुक्रवार को यहां केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, राज्य शासन, एसोचैम और इन्वेस्ट इंडिया की संयुक्त भागीदारी में हुए शिखर सम्मेलन में नेशनल एग्रीकल्चर कोआपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (नाफेड) ने मुरैना के शहद उत्पादक समूह के साथ एमओयू साइन किया है।
सम्मेलन का वर्चुअल शुभारंभ केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि ग्वालियर-चंबल फूड प्रोसेसिंग इकाईयों की स्थापना के लिहाज से काफी संभावनाओं वाला है। यहां बड़ी कंपनियां यूनिट खोलेंगी तो इससे स्थानीय छोटे, मझोले किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। यहां यूनिट लगाने वाली कंपनियों को केंद्र और राज्य सरकार की ओर से हरसंभव मदद दी जाएगी। आत्मनिर्भर पैकेज के तहत भारत सरकार फूड प्रोसेसिंग की 10 हजार छोटी इकाईयों की स्थापना में मदद करेगी।
आलू, टमाटर, शहद और अमरूद की पैदावार की स्थिति
टमाटर: शिवपुरी जिले में टमाटर का रकबा 7 से 10,000 हेक्टेयर होता है। पिछले बार टमाटर के दामों में भारी गिरावट रहने से इस बार रकबा घटा है। करीब 21 लाख 70 हजार क्विंटल उत्पादन का अनुमान है।
आलू : ग्वालियर में आलू के लिए 10 हजार हेक्टेयर क्षेत्र निर्धारित है। जबकि 2.5 से 3000 हेक्टेयर में करीब 7.5 लाख क्विंटल आलू का उत्पादन हो पा रहा है।
शहद: मुरैना जिला शहद का बड़ा उत्पादक है। यहां सालाना 3000 मीट्रिक टन उत्पादन होता है। यहां 100 रुपए प्रतिकिलो के हिसाब से सालाना 30 करोड़ के शहद का उत्पादन होता है।
अमरूद: श्योपुर जिले में 1200 से 1400 हेक्टेयर में अमरूद के बाग हैं। एक हेक्टेयर में 250 क्विंटल अमरूद निकलता है। साल में करीब 3.5 लाख क्विंटल अमरूद का उत्पादन होता है।