रसोई गैस फिर 25 रुपए महंगी:5 दिन में 50 रुपए बढ़ा दिए दाम, भोपाल में 825 और ग्वालियर में 903 रुपए का सिलेंडर
सरकारी तेल कंपनियों ने रसोई गैस सिलेंडर की कीमतें एक बार फिर बढ़ा दी है। इस बार 14.2 किग्रा के बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर के दाम 25 रुपए बढ़ाए गए हैं। ग्वालियर में इसकी कीमत 903 रुपए हो गई है। इसके साथ ही पिछले तीन महीने में घरेलू गैस की कीमत 225 रुपए बढ़ गई है। इससे पहले एक दिसंबर 2020 को घरेलू गैस की कीमत 50 रुपए बढ़ाई गई थी।
फिर 1 जनवरी को 50 रुपए, चार फरवरी को 25 रुपए, 15 फरवरी को 50 रुपए और 25 फरवरी को 25 रुपए बढ़ाए गए थे। बड़ी परेशानी तो यह है कि कोरोनाकाल से बंद सब्सिडी इस बार भी नहीं मिलेगी। सिलेंडर की बेस प्राइज 520 रुपए मानते हुए एक सिलेंडर पर 303 रुपए सब्सिडी सरकार के खाते में जा रही है। यानी एक माह की 3.39 अरब रुपए केंद्र सरकार के खाते में जा रहे हैं। यही नहीं घरेलू सिलेंडर पर 5 प्रतिशत जीएसटी अलग से देनी पड़ती है। इससे भी हर माह सरकार करीब 44 करोड़ रु. सरकार कमा रही है। इनमें से आधा यानी 22 करोड़ रुपए राज्य सरकार को मिलता है।

‘व्यवसाय बंद कर दो। चूल्हा फूंको। जुमले खाओ’
‘एलपीजी सिलेंडर के दाम फिर बढ़ गए। जनता के लिए मोदी सरकार के विकल्प, ‘व्यवसाय बंद कर दो। चूल्हा फूंको। जुमले खाओ।’
-राहुल गांधी, सोशल मीडिया पर
5 प्रतिशत जीएसटी की आधी रकम राज्य के हिस्से में भी आ रही है
अभी आपको कितनी सब्सिडी मिलनी चाहिए?
-11 माह पहले अप्रैल माह में भोपाल के एलपीजी ग्राहकों को घरेलू गैस पर 162.36 रुपए की सब्सिडी मिली थी। इसके बाद सिलेंडर का दाम 742.50 रुपए थे। इस हिसाब से ग्राहकों को 244.7 रुपए की सब्सिडी मिलनी थी। इस हिसाब से यह सिलेंडर 662.64 रुपए का मिलता।
-एक सिलेंडर पर सरकार को 5% जीएसटी देना पड़ रही है। इस हिसाब से घरेलू गैस पर 41.25 रुपए प्रति सिलेंडर केवल टैक्स के जा रहे हैं। कमर्शियल सिलेंडर पर 18% जीएसटी है। इस पर 247 रुपए केवल जीएसटी के जा रहे हैं।
जीएसटी में राज्य का हिस्सा कितना है?
-कुल 5% जीएसटी में 2.5% राज्य और 2.5% केंद्र को जाते हैं। यानी हर माह 40 करोड़ रुपए मिलते हैं। इसमें 20 करोड़ रुपए केंद्र और 20 करोड़ ही राज्य सरकार को मिलते हैं।
गर्मियों में कितनी है एलपीजी की खपत ?
-मप्र में कुल 1.53 करोड़ एलपीजी ग्राहक हैं। भोपाल में एलपीजी कनेक्शनधारकों करीब 8.50 लाख है। गर्मियों में मप्र में गैस की हर सप्लाई 1.20 करोड़ से घटकर 95 लाख ही रह जाती है।