शिक्षक ने केबीसी में एक लाख रुपए जीतकर खरीदे प्रोजेक्टर-लैपटॉप, मोहल्ले में बनाई स्मार्ट क्लास, सरकारी स्कूल के 30 बच्चों को पढ़ा रहे
दीवारों पर सुर्ख गुलाबी रंग। फर्श पर सोशल डिस्टेंसिंग से बैठे 25-30 बच्चे। सामने की दीवार पर प्रोजेक्टर से कुछ दृश्य उभरे। शिक्षक अमित यादव ने पूछा- 1 और 2 को जोड़ेंगे तो कितना होगा? सवाल सुनते ही बच्चों का दिमाग और अंगुलियां चलने लगी। कुछ सेकंड में ही एक साथ कई आवाज गुंजी- तीन।
यह दृश्य किसी प्राइवेट स्कूल या कोचिंग का नहीं है, बल्कि सरकारी मोहल्ला क्लास का है। कोरोना के चलते शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को मोहल्ला क्लास चलाने के निर्देश दिए हैं। रहली के इमलिया प्राथमिक स्कूल के शिक्षक यादव ने इन मोहल्ला क्लास को स्मार्ट क्लास बना दिया। वह भी कौन बनेगा करोड़पति में जीते एक लाख रुपए से।
28 अक्टूबर को प्रसारित हुए 23वें एपिसोड में प्ले अलॉन्ग गोल्ड स्कीम के तहत ऑनलाइन खेलते हुए यादव ने 10 सवालों के सही जवाब दिए। उन्हें एक लाख रुपए का पुरस्कार मिला। शिक्षक यादव ने इस रकम में से 72 हजार रुपए का प्रोजेक्टर और लैपटाप खरीदा। दो हजार रुपए के स्पीकर लाए। शिक्षक यादव बताते हैं पहले बच्चों को बुलाने घर-घर जाता था, तब भी 5-6 बच्चे ही आते थे। अब स्मार्ट क्लास में पढ़ने के लिए बच्चे दौड़े चले आते हैं। रोज ही 30 से ज्यादा बच्चे आ जाते हैं। प्रोजेक्टर पर ये आसानी से समझ भी रहे हैं।
बच्चों को ये पढ़ा रहे
क ख ग घ, ए बी सी डी, पंचतंत्र की कहानियां, जोड़-घटाव, साउंड सिस्टम से प्रार्थना, यूट्यूब से रोचक वीडियो। यादव के अनुसार वे पूरे स्कूल को स्मार्ट स्कूल बनाना चाहते हैं, ताकि सभी क्लास के बच्चों को एक साथ खेल-खेल में पढ़ाई कराई जा सके।
3 साल से 40 विद्यार्थियों को बांट रहे बैग-बाॅटल
1999 से शिक्षा विभाग में सेवाएं शुरू करने वाले शिक्षक यादव 2008 से इमलिया में पदस्थ हैं। अभिभावकों को बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रेरित करने के लिए वे 3 साल से निजी खर्च कर कक्षा पहली से तीसरी तक के 40 बच्चों को स्कूल बैग और पानी की बॉटल बांट रहे हैं। इसके सकारात्मक परिणाम आए। 2 साल पहले स्कूल में 59 विद्यार्थी दर्ज थे। जिनकी संख्या बढ़कर 72 हो गई है। इस साल भी सभी 72 विद्यार्थियों को बैग बांटने का निर्णय लिया है।
सराहनीय कार्य, सम्मानित करेंगे
^ऐसा भी होनहार शिक्षक ही कर पाते हैं जो अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित है, शिक्षक ने अपने नाम की राशि से स्कूल में बच्चों के लिए संसाधन जुटाए, यह सराहनीय है ऐसे कार्यों को प्रोत्साहन देने के लिए उन्हें सम्मानित किया जाएगा, इससे अन्य शिक्षक भी प्रेरित होंगे।
- मनीष वर्मा, संयुक्त संचालक लोक शिक्षण सागर