जीपीएस और गर्वनर बिना ही सड़कों पर दौड़ रही हैं बसें, कन्ट्रोल सेंटर ही नहीं बना
ग्वालियरा. बिना परमिट दौड़ रही बसों से यात्रियों की जान खतरे में है लेकिन इसके पीछे परिवहन विभाग की लापरवाही ही मुख्य कारण है दरअसल, परिवहन विभाग ने 3 वर्ष पूर्व ही यात्री बसों में जीपीएस सिस्टम लगाना अनिवार्य कर दिया था।
जीपीएस और स्पीड गवर्नर लगे होने पर ही परिवहन विभाग फिटनेस प्रमाण पत्र देता है और इसके बाद संबंधित यात्री वाहन को परमिट मिलता है। लेकिन प्रदेश में दौड़ रही लगभग 35 हजार बसों में जीपीएस सिस्टम की मॉनीटरिंग के लिये अफसर कमाण्ड एंड कन्ट्रोल सेंटर नहीं बनवा सके हैं इसी वजह से बिना परमिट और बिना फिटनेस के बसें चलाई जा रही।
जानकारों के अनुसार यदि बसों की निगरानी उनमें जीपीएस सिस्टम से मॉनीटरिंग शुरू की जाये तो बिना परमिट और रूट बदलकर चलने वाली बसों को आसानी से पकड़ा जा सकेगा।
प्रदेश और ग्वालियर में कितनी बसों की जांच और क्या की गई कार्रवाई
प्रदेश में 12927 बसों की जांच हुई। इनमें ग्वालियर की 350 बसें शामिल हैं।
89 बसें बिना परमिट के दाैड़ते मिलीं। इनमें ग्वालियर की 12 बसें हैं।
ओवरलोडिंग वाली 751 बसें मिलीं। ग्वालियर में ऐसी 35 बसें पकड़ी गईं।
क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने पर क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार मुरैना की 6 बसों का परमिट खत्म किया। ग्वालियर की 6 बसों का परमिट खत्म करने की कार्रवाई चल रही है।