3 गांवों में स्वच्छता की अलख शहर की तरह डाेर-टू-डाेर कचरा कलेक्शन, अब खाद बनाने की भी तैयारी शुरू
गोबर, कीचड़ और कचरे की गंदगी अब गांवाें काे प्रदूषित नहीं करेगी। स्वच्छता की मुहिम से जिले के तीन गांव जुड़ गए हैं। चार महीने से इन गांवाें के हर परिवार से न सिर्फ सफाई शुल्क के 30 रुपए लिए जा रहे हैं बल्कि लाेग इस व्यवस्था में सफाई दूत बनकर काम भी कर रहे हैं।
जिला पंचायत ने पहले चरण में 100 ग्राम पंचायतों को सफाई मिशन में शामिल किया है। इनमें से तीन ग्राम पंचायत बरई, जौरासी और टेकनपुर में इसका असर दिखाई देने लगा है। इन गांवाें में शहर की तरह सुबह सफाईकर्मी घर-घर से कचरा एकत्रित करते हैं। ये कचरा गीला एवं सूखा अलग-अलग डस्टबिन में लिया जाता है। लाेगाें के जागरुक हाेने की वजह से अब इन गांवाें की सड़कें व सार्वजनिक स्थल पूरी तरह से गंदगी रहित हो गए हैं।
सीईओ जिला पंचायत किशोर कन्याल का कहना है कि शहर की तरह अब ग्रामीण क्षेत्र में घर-घर से कचरा कलेक्शन व्यवस्था लागू की गई है। गांव के लोग भी इसमें सहयोग कर रहे हैं। इस कारण गांवाें में हालात बदलने लगे हैं।
लोग भी कर रहे समर्थन
हमारे यहां 4 महीने पहले सफाई शुल्क की व्यवस्था शुरू की गई थी। पहले लाेग इसका विरोध कर रहे थे, लेकिन अब वही लोग इसके समर्थन में हैं। अब गांव में सड़कों पर गंदगी नहीं दिखाई देती। लोग डस्टबिन में ही कचरा डालते हैं।
-हेमलता किरार, सरपंच, जौरासी
कहां-कैसी सफाई व्यवस्था
बरई: आबादी 9000, यहां 3 सफाईकर्मी नियुक्त किए गए हैं।
टेकनपुर: 14000 आबादी वाले इस गांव में 5 सफाईकर्मी तैनात हैं।
जाैरासी: 3000 आबादी वाले इस गांव में 2 सफाईकर्मी काम कर रहे हैं।
जैविक खाद बनेगी और पंचायत को होगी कमाई
1. ऐसा गीला कचरा, जो कि गल सकता है उससे जैविक खाद बनाई जाएगी। इसके लिए कंपोस्ट तैयार किए गए हैं।
2. ऐसा सूखा कचरा, जिसे रीसायकल कर उपयोग में लाया जा सकता है। उसे बेचकर पैसा कमाएंगे।
3. ऐसा कचरा, जिसका कोई उपयोग नहीं किया जा सकता। उसे गड्ढे में भरवाया जाएगा।
ऐसे बनाई है व्यवस्था
1. सफाईकर्मी गांव में फेरी लगाते हैं और कचरा उठाकर गांव के बाहर बने कचरा संग्रहण केंद्र में डालते हैं। 150 परिवारों पर एक गाड़ी है और एक गांव के लिए बड़ी कचरा गाड़ी खरीदी गई है।
2. स्वसहायता समूहों के माध्यम से तैनात कर्मचारी कचरे की छंटनी करेंगे। तीन कैटेगरी में बंटे कचरे से जैविक खाद भी बनाई जाएगी।