किसानों का रेल रोको आंदोलन:रेलवे स्टेशन के बाहर चेकिंग ही करती रह गई पुलिस, अंदर पटरियों पर लेट गए किसान, घसीटकर बाहर खदेड़ा

कृषि कानूनों के विरोध में किसानों ने गुरुवार को देशभर में रेल रोको आंदोलन का ऐलान किया था। इसी कड़ी में ग्वालियर में भी आंदोलन किया गया। इस दौरान किसानों ने जमकर हंगामा किया। हालांकि पुलिस ने भी इसे रोकने के लिए तैयारी कर रखी थी। रेलवे स्टेशन के बाहर किसानों को रोकने के लिए पुलिस तैनात थी, लेकिन पुलिस का दावा दोपहर फेल हो गया। सैकड़ों की संख्या में जवान स्टेशन के बाहर खड़े चौकसी करते रह गए और इधर, आंदोलनकारी अंदर पटरियों पर लेट गए।

जब हंगामे का पता लगा, तो तत्काल फोर्स अंदर पहुंचा। पटरियों पर लेटे महिला, पुरुषों को खदेड़ते हुए बाहर ले गए। पुलिस ने डंडे के जोर पर 10 मिनट में ट्रैक साफ करा दिया। आंदोलन कारी किसान रेलवे स्टेशन से आधा किलोमीटर दूर एजी ऑफिस पुल के नीचे से ट्रैक पर पहुंचे और पैदल चलकर स्टेशन के पास आए। इस दौरान रेलवे स्टेशन पर करीब 1 से 1.30 बजे के बीच हंगामा चलता रहा। अब जीआरपी इन आंदोलन करने वालों पर FIR की तैयारी कर रही है।

केन्द्र सरकार के तीन कृषि कानून के विरोध में करीब 85 दिन से किसान आंदोलन चल रहे हैं। दिल्ली और उसके आसपास पंजाब, हरियाणा बॉर्डर पर सबसे ज्यादा किसान डटे हैं। इसी सिलसिले में किसान संगठनों ने देशभर में गुरुवार को 12 से 4 बजे के बीच रेल रोको आंदोलन की घोषणा की थी। ग्वालियर में भी किसानों, किसान संगठन, माकपा के सदस्यों ने रेल रोकने के लिए हंगामा किया और पटरियों पर लेटकर नारेबाजी की। अखिल भारतीय किसान सभा के नेतृत्व में करीब आधा सैकड़ा से अधिक लोग गुरुवार दोपहर ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर पहुंच गए। पुलिस बाहर खड़ी पहरा दे रही थी। यह किसान अंदर पहुंचकर पटरियों पर लेट गए।

जब बाहर खड़ी पुलिस को यह पता लगा, तो पुलिस एक्शन मोड में आई। एएसपी रेल प्रतिमा एस मैथ्यू के नेतृत्व में अंदर पहुंची। अंदर पटरियों पर लेटी मंहिलाएं, किसानों को पहले ट्रैक खाली करने की समझाइश दी गई, लेकिन जब आंदोलनकारी नहीं माने तो पुलिस को डंडा चलाना पड़ा। फोर्स ने महिलआों और पुरुषों को उठाकर ट्रैक से दूर कर बाहर खदेड़ दिया।

150 जवानों और अफसर करते रह गए चेकिंग

किसानों को रेल की पटरियों पर जाने रोकने के लिए 150 से ज्यादा जवान पुलिस और जीआरपी के लगाए थे। साथ ही, करीब 15 अफसर वहां इंस्पेक्टर, सीएसपी व एएसपी स्तर के मौजूद थे। स्टेशन आने वाले हर रास्ते पर पूछताछ और चेकिंग की जा रही थी। जिनको ट्रेन में यात्रा करना था, उनके साथ आए लोगों को भी अंदर नहीं जाने दिया जा रहा था। इसके बाद भी आंदोलन करने वाले अंदर पहुंच गए और पटरियों पर लेट गए।

चोर रास्तों से पहुंचे अंदर

रेलवे स्टेशन के बाहर पुलिस तैनात थी, लेकिन शहर में कई ऐसे रास्ते हैं, जहां से बिना टिकट यात्रा करने वाले और ट्रेनों में वारदात करने वाले आते-जाते हैं। किसानों ने भी ऐसे ही रास्ते का उपयोग पुलिस से बचकर स्टेशन तक पहुंचने में किया। किसान एजी ऑफिस पुल के नीचे से ट्रैक पर आए और पैदल-पैदल पटरियों पर चलकर स्टेशन के नजदीक झांसी छोर पर पहुंचे।