गाय के हमले में पिता की माैत हुई तो बेटे ने गोबर से सामान बनाना सीखा, गौवंश को खिला रहे चारा

75 साल के बुजुर्ग नाथूराम को 11 साल पहले सड़क पर घूमने वाली निराश्रित गाय ने सींग मार दिया था। इलाज के दौरान बुज़ुर्ग का निधन हो गया। इसके बाद उनके बेटे गोपाल झा ने प्रण किया कि निराश्रित गायाें के गोबर से धन कमाकर ऐसी गायों के लिए चारे का इंतजाम करेंगे, ताकि सड़क पर घूमने वाला भूखा निराश्रित गौवंश उनके पिता की तरह किसी और को अपना शिकार न बनाए।

श्री झा 2010 से गोबर के खिलौने, सजावटी सामान और गिफ्ट आइटम तैयार कर रहे हैं। वे 10 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। गोबर के सामान बनाने से मिलने वाले धन का एक हिस्सा यह लोग निराश्रित गौवंश के लिए चारे का इंतजाम करने में खर्च कर रहे हैं। वह रोज हरा चारा गाय और बछड़ों को खिलाते हैं।

गायों को लोग सड़क पर न छोड़ें इसलिए खरीदता हूंं गोबर

वर्ष 2009 में मेरे पिता सब्जी लेने बाजार गए थे। सड़क पर घूमती एक गाय ने उन्हें सींग मार दिया। इस कारण गंभीर रूप से घायल हुए पिता का कुछ समय बाद निधन हो गया। इस घटना ने मुझे विचलित कर दिया। उन लोगों के खिलाफ मेरे मन में आक्रोश था, जो दूध न देने पर गाय को सड़क पर छोड़ देते हैं। उसी समय मैंने सोच लिया था कि गाय के गोबर को कीमती बना दूंगा ताकि लोग गाय को निराश्रित न छोड़ें। इसके बाद गोबर से घड़ी, खिलौने, मंडप में लगने वाली मटकी तथा गिफ्ट आइटम बनाना सीखा। गोबर इकट्ठा करने के लिए सड़क पर घूमने वाली गायों के पीछे कनस्तर लेकर जाता था।

इनका गोबर लेकर खिलौने बनाता था और हाट बाजार में बेचने जाता था। नियम था, जो भी कमाऊंगा उसमें से निराश्रित गायों को चारा जरूर खिलाऊंगा। नियम अब भी जारी है। मेरे साथ 10 और लोग यह काम कर रहे है। हम 5 रुपए किलो के मान से गोबर खरीदते हैं। प्रति व्यक्ति 10 से 15 हज़ार रुपए कमाते हैं और प्रति दिन अपनी कमाई में से 50 से 100 किलो तक चारा गायों को खिलाते हैं। कोशिश यही है लोग दूध न देने वाली गाय को सड़क पर न छोड़ें।