शहर में कृषि भूमि के नाम पर रजिस्ट्री होंगी बंद, बाजारों में मकान-दुकान के समान रेट

जमीन की कीमतों में अब 15 फीसदी वृद्धि नहीं, बल्कि लंबा उछाल आ सकता है। उप मूल्यांकन समिति ने अब तक जो भी होमवर्क किया था, वह बेकार साबित हुआ। विभाग चाहता है कि अब बाजारों में आवासीय रेट खत्म कर दिए जाएं। जहां घनी आबादी है, वहां पर कृषि भूमि का स्लैब न रखा जाए। दोनों ही काम कर चोरी रोकने और आय बढ़ाने की मंशा से किए जा रहे हैं। वर्ष 2015 से संपत्ति की कीमत तय करने वाली कलेक्टर गाइड लाइन में कोई वृद्धि नहीं हुई है। इसी कारण 30 जनवरी को प्रदेशभर में संपत्ति की कीमतों में वृद्धि के बिंदु जिला पंजीयकों को बताए गए।

वापस हुए सारे प्रस्ताव

नगर निगम के 66 वार्डों में जमीन के रेट अधिकतम 15 फीसदी तक की वृद्धि के बाद तय हो गए थे। महानिरीक्षक पंजीयन के निर्देश के बाद कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने दोबारा होमवर्क करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद ही वापस हुए पुराने सारे रेट की जांच अब दोबारा की जा रही है।

ये हैं 2 बिंदु.. जो रेट बढ़ाएंगे

सघन व्यावसायिक क्षेत्र जैसे मुरार में सदर बाजार, बजाज खाना, थाटीपुर, सिटी सेंटर और बाड़ा क्षेत्र में दौलतगंज, जयेंद्रगंज आदि अब आवासीय क्षेत्र नहीं बचे हैं। इसी कारण यहां व्यावसायिक और आवासीय रेट एक जैसे किए जाएं।
शहर के अंदर कई वार्ड ऐसे हैं, जहां अब कृषि भूमि नहीं बची है। अधिकतर क्षेत्रों में व्यवसायिक गतिविधियां चल रही हैं, यहां कृषि भूमि के रेट खत्म कर दिए जाएं। अभी कृषि भूमि की रजिस्ट्री होती है।

4 बिंदुओं के कारण बढ़ेंगे रेट

अभी 3662 लोकेशन हैं। अब विकास की गतिविधियों की जांच के बाद नई लोकेशन तय होंगी।
नई कॉलोनी और मार्ग तथा स्मार्ट सिटी के निर्माण होने के बाद उस क्षेत्र की दरों काे ठीक किया जाए।
मास्टर प्लान, विजन डॉक्यूमेंट के हिसाब से भी जमीन की वास्तविक रेट के लिए होमवर्क किया जाए।
शहर से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में अब शहर जैसा विकास हो रहा है। यहां जमीन की कीमत तय की जाएं।
व्यस्त बाजारों में आवासीय क्षेत्र खत्म हो गए हैं, इसी कारण यहां पर आवासीय और व्यवसायिक रेट एक समान किए जा रहे हैं। घनी आबादी क्षेत्र में अब कृषि भूमि नहीं बची है, इसलिए कृषि भूमि के रेट तय नहीं होंगे। -डॉ. दिनेश गौतम, जिला पंजीयक