एक साल पहले सरकार के पास पहुंचा था प्रस्ताव, अब विजन डॉक्यूमेंट में भी जगह नहीं
गोले का मंदिर चौराहे पर पिछले 35 वर्ष से प्रस्तावित एक हजार बिस्तर के अस्पताल (मार्क हॉस्पिटल) पर प्रदेश सरकार फिर चुप्पी साध गई है। एक साल पहले प्रदेश सरकार के पास देश के किसी बड़े निजी अस्पताल समूह को जगह देकर इसे तैयार कराने का प्रस्ताव पहुंचा था। लेकिन प्रदेश में हुए सत्ता परिवर्तन और कोरोनाकाल में बीते समय के बाद अब सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधि इस मामले में पहले की तरह सक्रिय नहीं है।
स्थिति ये है कि अगले 5 साल के लिए शहर के विकास का खाका तैयार करने वाले विजन डॉक्यूमेंट में भी इस प्रोजेक्ट को अहमियत नहीं दी गई। जबकि, हाल ही में कोरोना महामारी के दौरान चिकित्सा व्यवस्था भी लड़खड़ाई नजर आई थी यदि इस अस्पताल को तैयार किया होता तो स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर ये परेशानी नहीं आती।
स्वास्थ्य सेवा का हाल: 2732 लोगों पर सिर्फ 1 डॉक्टर
डब्ल्यूएचओ के अनुसार 1000 मरीज पर डॉक्टर चाहिए: 1
जिले की आबादी: 20.6 लाख
जेएएच व जिला अस्पताल की बिस्तर क्षमता (गंभीर मरीजों का इलाज जेएएच में ही होता है) : 1200
जिले में सरकारी डॉक्टर: 754
टाइमलाइन: अस्पताल बनाने अब तक 3 कोशिश... हर बार फेल
माधवराव सिंधिया ने केंद्र सरकार में मंत्री रहते हुए 1986 में गोला का मंदिर चौराहे के पास 20 एकड़ जमीन का आवंटन अस्पताल के लिए कराया था। 10 जून 1989 को तत्कालीन पीएम राजीव गांधी ने ग्वालियर आकर इस जगह पर 1000 बिस्तर वाले इंदिरा गांधी अस्पताल के लिए शिलान्यास किया। अस्पताल को सऊदी अरब के सहयोग से बनाना प्रस्तावित था मगर उस वक्त कुवैत व इराक युद्ध के कारण प्रोजेक्ट पर काम शुरू नहीं हो सका।
प्रोजेक्ट में निजी निवेश की प्लानिंग के साथ ये जमीन 2000 में हॉटलाइन इंडस्ट्रीज ग्रुप को दे दी गई। ग्रुप ने तब मार्क हॉस्पिटल बनाने के लिए काम शुरू हुआ और जमीन के कुछ हिस्से पर स्ट्रक्चर खड़ा भी किया, लेकिन ग्रुप के घाटे में पहुंचा और उसकी मालनपुर में इंडस्ट्रीज बंद होने के साथ अस्पताल का भी काम रूक गया। जितना इंफ्रास्ट्रक्चर हॉटलाइन ग्रुप ने बनाया था वही बना हुआ है और फिलहाल वहां नगर निगम ने अस्थाई गौशाला बना दी है।
प्रदेश की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 2002 में दिल्ली के एस्कॉर्ट हॉस्पिटल से यहां हॉस्पिटल बनाने व संचालित के लिए एमओयू पर चर्चा शुरू हुई। 2003 में भाजपा सरकार ने इस एमओयू में दिलचस्पी नहीं ली। जिससे ये प्रोजेक्ट थम गया और कुछ वर्ष पहले प्रदेश सरकार ने महिला एवं बाल विकास व दूसरे विभागों को जमीन का आवंटन कर दिया था। फिर ये मामला हाईकोर्ट में पहुंचा और हाईकोर्ट की सख्ती के बाद विभागों के आवंटन निरस्त हो गए।
प्रस्ताव सरकार के पास भेजेंगे
मार्क हॉस्पिटल का बिंदु मुख्यमंत्री की बैठक के एजेंडे में रखा गया था और अभी उसके लिए प्लानिंग की जानी है। अस्पताल किस प्रकार तैयार कराया जा सकता है इसके लिए जल्द ही रूपरेखा तैयार कराई जाएगी और उसके प्रस्ताव को सरकार के पास भेजा जाएगा।
-कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर
शासन से पत्र व्यवहार कर चुका हूं
इस हॉस्पिटल के निर्माण को लेकर मैं शासन स्तर पर पत्र व्यवहार कर चुका हूं और जल्द ही मुख्यमंत्री के सामने इसे रखा जाएगा। इसके तैयार होने पर ग्वालियर ही नहीं आसपास के दूसरे जिले में रह रहे लोगों को भी स्वास्थ्य सुविधा का लाभ होगा।
-डॉ. सतीश सिकरवार, विधायक
प्रस्ताव पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई, अिधकारियों से चर्चा करूंगा
मैंने विधायक रहते इस प्रोजेक्ट के लिए प्रस्ताव तैयार कराया था, लेकिन उस पर आगे कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इस बारे में अधिकारियों से चर्चा करूंगा और इस मामले में को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने भी रखूंगा।
मुन्नालाल गोयल, पूर्व विधायक