नगर निगम में इसी महीने से होगा मैरिज गार्डन का पंजीयन, दो द्वार बनवाना जरूरी

शादी समारोह के लिए शहर में संचालित सभी मैरिज गार्डन का पंजीयन अब नगर निगम करेगा। इसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसके लिए एक प्रस्ताव तैयार कर प्रशासक आशीष सक्सेना के पास संकल्प के लिए भेजा जाएगा। वहां से संकल्प पारित होने के बाद इसी महीने पंजीयन की शुरूआत की जा सकती है। इसके बाद मनमर्जी के मैरिज गार्डन नहीं चल सकेंगे।

हर मैरिज गार्डन को सुरक्षा की दृष्टि से एक विवाह स्थल के लिए दो द्वार बनाना जरूरी होंगे। यदि किसी गार्डन में एक ही दरवाजा होगा तो उसे आवेदन से पहले दो दरवाजे बनाना होंगे। साथ ही यदि एक मैरिज गार्डन में दो विवाह एक साथ होंगे तो उसमें चार द्वार बनाने होंगे। एक द्वार से प्रवेश और दूसरे से निकासी की व्यवस्था करना होगी। यही नहीं मैरिज गार्डन संचालकों को पार्किंग और अन्य सुविधा के लिए 25 प्रतिशत खुला क्षेत्र छोड़ना जरूरी होगी। वहां पर वाहन सुरक्षा के साथ खड़े हो सकें। इसकी जिम्मेदारी भी गार्डन संचालकों की रहेगी।

ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य

नगर निगम उन्हीं मैरिज गार्डन संचालकों का पंजीयन करेगा, जिनके पास प्रवेश द्वार तक पहुंचने के लिए 12 मीटर चौड़ी सड़क होगी। इससे ट्रैफिक में बाधा उत्पन्न नहीं होगी, क्योंकि संकरे रास्तों पर वाहन खड़े होने से रास्ता जाम हो जाता है।
मैरिज गार्डन में मौजूद अतिथियों की सुरक्षा के लिए गार्डन के चारों तरफ से सुरक्षा दीवार बनाना होगी।
अग्नि सुरक्षा के लिए सिस्टम निगम के दमकल विभाग के नियमों अनुरूप ही लगेगा। इसमें खामी पर पंजीयन निरस्त कर दिया जाएगा।
4000 से 12000 रुपए तक चुकानी हाेगी पंजीयन राशि

500 से 1000 वर्ग मीटर: चार हजार रुपए और वार्षिक शुल्क तीन हजार रुपए लिया जाएगा।
1000 से 1500 वर्ग मीटर: 5 हजार पंजीयन शुल्क लिया जाएगा। हर साल 3500 रुपए शुल्क देना होगा।
1501 से 2500 वर्ग मीटर : 7500 पंजीयन राशि और सात हजार रुपए वार्षिक शुल्क लिया जाएगा।
2501 से 5000 वर्ग मीटर : 10 हजार रुपए पंजीयन राशि और 9 हजार रुपए वार्षिक शुल्क रहेगा।
5000 हजार से ऊपर: 12500 रुपए पंजीयन शुल्क और 15 हजार रुपए वार्षिक किराया देना होगा।
अभी ये है व्यवस्था... शहर में मैरिज गार्डन का नगर निगम सिर्फ ट्रेड लाइसेंस जारी करती है। इसके अलावा जमीन के हिसाब से सपंत्तिकर जमाया कराया जाता है।

ये व्यवस्थाएं भी करना होंगी

आतिशबाजी के लिए अलग से स्थान तय करना होगा।
विकसित क्षेत्र, पौधे और लैंडस्केपिंग करना होगी।
वाटर हार्वेस्टिंग कराना जरूरी होगा।
महिला और पुरुषों के शौचालय एवं यूरिनल अलग होंगे।
मैरिज गार्डन पर सुरक्षा के लिए सुरक्षा गार्ड तैनात करना होंगे।
शपथ-पत्र भी देना होगा

विवाह स्थल पर सफाई, उत्पन्न कचरे एवं अपशिष्ट पदार्थों का संग्रहण एवं निस्तारण का खर्चा खुद संचालक वहन करेगा। सड़क पर कचरा नहीं डाला जाएगा।
रात 10 बजे से सुबह 8 बजे तक विवाह स्थलों पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग नहीं किया जाएगा।
ऐसी गड़बडी पर रहेगी नजर

मैरिज गार्डन संचालक दो द्वार बनाकर एक से अधिक शादी एक साथ नहीं करा पाएंगे। दो द्वार की व्यवस्था एक विवाह के लिए होगी।
पार्किंग स्थल दिखाने के बाद बड़े सहालग में उसी स्थान पर टैंट लगाना और वाहनों को खड़े करने की व्यवस्था रोड पर नहीं कर सकेंगे।