प्रदूषण जांचने की बात तो दूर, पेट्रोल पंपों पर वाहनों में मुफ्त हवा भी नहीं भर रहे हैं संचालक
पेट्रोल पंप संचालकों को एक माह के भीतर वाहनों में हवा भरने की मशीन की ही तरह प्रदूषण जांचने वाली मशीन लगाने के लिए प्रशासन द्वारा कहा गया है। शहर के अधिकांश पंपों पर प्रदूषण जांच की बात तो दूर पंप संचालक पेट्रोल-डीजल भरवाने के लिए आने वाले वाहनों में हवा भरने को तैयार नहीं हैं। ज्ञात हो कि ग्वालियर की नगर निगम सीमा में तीन सरकारी और दो निजी क्षेत्र की तेल कंपनियों के 90 पंप हैं। इनसे हर रोज 2 लाख लीटर पेट्रोल और 4 लाख लीटर डीजल बिकता है।
पेट्रोल पंपों पर पेट्राेल-डीजल भरवाने के लिए आने वाले वाहनों के लिए हवा की नि:शुल्क व्यवस्था करने के पंप संचालकों को आदेश दिए गए हैं। बावजूद इसके अधिकांश पंपों पर कहीं एयर मशीन खराब है तो कहीं हवा भरने वाले कर्मचारी नहीं हैं। सोमवार को इस संवाददाता द्वारा रेलवे स्टेशन स्थित पेट्रोल पंप, चेतकपुरी और सनातनधर्म मंदिर स्थित पंप पर दो पहिया वाहन में हवा भरवाने के लिए पूछताछ की तो तीनों ही स्थानों पर हवा भरने वाले कर्मचारी नहीं होने का हवाला देकर हवा भरने से मना कर दिया गया।
प्रशासन द्वारा अभी पंप संचालकों को मौखिक रूप से एक माह के भीतर पीयूसी(पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल) मशीन लगाने के लिए कहा गया है। इसका पूरा सैटअप करीब पांच लाख रुपए का है। पंप संचालकों का कहना है कि जब पंप पर लगी हुई हर मशीन तेल कंपनियों द्वारा लगाई जाती है फिर पीयूसी मशीन लगाने पर होने वाला खर्च वे अपनी जेब से क्यों उठाएं।
पीयूसी मशीन भी तेल कंपनियों द्वारा लगाई जानी चाहिए
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा देशभर के पंपों पर पीयूसी मशीन लगाने के लिए भारत सरकार को आदेश दिए हैं। इस आदेश का पालन सरकार को तेल कंपनियों के मार्फत कराना चाहिए न कि सीधे डीलरों के मार्फत। दरअसल पंप पर लगी हुई हर मशीन तेल कंपनियों द्वारा ही लगाई जाती है। इसलिए पीयूसी मशीन भी तेल कंपनियों द्वारा ही लगाई जानी चाहिए।
-अश्विनी अत्रीस, चीफ मेन्टोर एम्पावरिंग पेट्रोलियम डीलर्स फाउंडेशन