दूसरे राज्यों से ड्रग्स तस्कर इंदौर को बना रहे हैं ड्रग्स का क्रासिंग पाइंट

नशे के खिलाफ चल रहे अभियान के पुलिस ने करोड़ों की एमडी ड्रग्स बरामद की थी और अब एक-एक कर गिरोह से जुडे लोगों की धरपकड़ की जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार शहर ड्रग्स का क्रासिंग पाइंट बन गया है, यहां दूसरे राज्यों से ड्रग्स आती भी है और जाती भी है। तस्कर नशे की तस्करी के लिए रेल, बस और निजी वाहन को उपयोग करते हैं। यह खुलासा अब तक की जांच में हुआ है।

इंदौर शहर पहले से ड्रग्स का क्रासिंग पाइंट रहा है। पहले नेचरल ड्रग्स जैसे अफीम, कोकिन, ब्राउन शुगर और गांजे को तस्करी कर यहां लाता जाता था और फिर दूसरे राज्यों में भेजा जाता था। मंदसौर, नीमच और राजस्थान बार्डर के गांव में ही देश में अफीम की खेती होती है। इसके चलते वहां से यहां और फिर मेट्रो शहरों में भेजा जाता था, लेकिन अब सिंथेटिक्स ड्रग्स का भी क्रासिंग पाइंट हो गया है।

क्राइम ब्रांच ने कुछ दिन पहले 70 करोड़ की एमडी के संचालक दिनेश अग्रवाल उसके परिवार के लोग और वेदप्रकाश को पकड़ा था। इन लोगों से पूछताछ में पुलिस को पता चला कि यह ड्रग्स हैदराबाद से यहां आई थी और फिर राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में भेजी गई थी। इसके बाद पुलिस ने एक-एक कर इस गिरोह से जुडे 22 तस्करों को अब तक गिरफ्तार कर लिया है, जबकि कुछ अभी भी फरार है।

ओडिशा और आंध्र प्रदेश से आ रहा है गांजा

प्रदेश में गांजा जहां उड़ीसा और आंध प्रदेश से आ रहा है वहीं मंदसौर नीमच से नेचरल ड्रग्स। अब तक की पूछताछ में पुलिस को पता चला है कि तस्कर रेल और निजी वाहनों से तस्करी कर रहे हैं। जबकि निजी बसों में कुरियर के माध्यम से भी ड्रग्स की तस्करी हो रही है। अब पुलिस इन मार्गों पर भी नजर रखे हुए है।

नारकोटिक्स विंग ने भी गत वर्ष 121 ड्रग पैडलर पकड़े थे। नारकोटिक्स विंग के पिछले साल के आंकड़ों पर नजर डाले तो यह भी इसकी पुष्टि करते हैं। विंग ने 2020 में 121 लोगों को सिंथेटिक्स ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया है। इसमें कुछ दवाईयों की गोलियां हैं तो कुछ एमडी और केमिकल ड्रग्स के रूप में है। इसके बड़ी मात्रा में ड्रग्स जब्त हुई है। इसके अलावा स्कैम के साथ 10, अफीम के साथ 9, गांजे के साथ 19, गांजा पौधा के साथ 2, चरस के साथ 21, डोडाचुरा के साथ 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह इस बात का प्रमाण है कि इंदौर ड्रग्स का क्रासिंग पाइंट बना हुआ है।