मिहिर भोज विवाद-हाईकोर्ट ने 2021 में मांगी रिपोर्ट, 2026 में की गयी सीलबंद पेश

ग्वालियर. सम्राट मिहिर भोज को लेकर गुर्जर और क्षत्रिय समाज के दावों को लेकर आमने-सामने के मामले में गठित कमेटी की सीलबंद रिपोर्ट हाईकोर्ट में पहुंच गयी है। हाईकोर्ट ने सितम्बर 2021 में दोनों के दावों की जांच-पड़ताल कर रिपोर्ट देने के लिये कहा था। अब सितम्बर 2026 में यह रिपोर्ट हाईकोर्ट के सामने है।
क्या है मामला
यह मामला 2021 में राहुल साहू की जनहित याचिका से हाईकोर्ट पहुंचा था। मिहिर भोज की प्रतिमा पर नाम के साथ ‘‘गुर्जर’’ लिखे जाने के बाद विवाद बढ़ गया था। दोनों समाज मिहिर भोज को अपने-अपने समाज से जोड़ते रहे हैं। इस पर 24 सितम्बर 2021 को हाईकोर्ट ने एक कमेटी बनाई थी। जिससे ग्वालियर संभागायुक्त का कमेटी का अध्यक्ष और आईजी ग्वालियर रेंज को उपाध्यक्ष बनाया गया। कमेटी में दोनों समाजों के एक-एक प्रतिनिधि को भी शामिल किया गया। कमेटी को ऐतिहासिक साक्ष्य और साहित्य के आधार पर दावों की पड़ताल के साथ यह भी देखना था कि सार्वजनिक धन से लगी किसी राष्ट्रीय नायक की प्रतिमा के नाम के एक साथ जाति जोड़ना संवैधानिक भावना के अनुरूप है या नहीं। शासन की स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार इतिहासकारों की रिसर्च, विभिन्न स्थानों से जुटाई गयी जानकारी और दोनों समाजों के अभ्यावेदन भी रिपोर्ट भी शामिल है।
सुनवाई में पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता राजीव शर्मा ने विधायक साहब सिंह गुर्जर की ओर से कहा कि उनके क्षेत्र में बड़ी संख्या में गुर्जर समाज के लोग रहते हैं। जनप्रतिनिधि होने के कारण लोग उनके पास आते हैं। इसी वजह से उन्हें सॉफ्ट टारगेट बनाया जा रहा है। फिलहाल 2021 में कानून-व्यवस्था बनाए रखने को लेकर दी गई व्यवस्था प्रभावी है। उस आदेश में प्रशासन को सार्वजनिक स्थानों पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने और दोनों समाजों से संयम बरतने की अपेक्षा की गई थी।