फर्जी पासपोर्ट बनाने की शुरूआत डबरा से, बौद्ध बिहार के भिक्षु के ही 3 नाम, बांग्लादेशी इसी पते से बने भारतीय पासपोर्ट

ग्वालियर. बांग्लादेशियों के फर्जी भारतीय पासपोर्ट बनाने के मामले में जांच में नया खुलासा हुआ है। डबरा के जिस बुद्ध विहार के पते से 17 बांग्लादेशियों के भारतीय पासपोर्ट बने, वहां के भिक्षु के ही 3 अलग-अलग नाम सामने आये हैं। आधार कार्ड में नाम रामेश्वर जाटव, वोटर आईडी में भंते संघप्रिय और मठ की दीवार पर संघप्रिय महाथेरो लिखा है।
आधार कार्ड में रामेश्वर जाटव के पिता का नाम नारायण जाटव और पता दतिया का है। वहीं वोटर कार्ड आईडी में उनका नाम भंते संघप्रिय और पिता का नाम नारायण दर्ज है। उन्होंने बताया कि मैने कुछ दिन पहले ही बौद्ध धर्म अपनाया है। धर्म अपनाने के बाद मेरा नाम संघप्रिय रखा गया है। जांच टीम ने पूछा बौद्ध धर्म अपनाने के बाद क्या दस्तावेज बदल जाते है। उन्होंने कहा-नहीं उनसे पूछा कि फिर वोटर आईडी में संघप्रिय कैसे दर्ज है। इस सवाल के जवाब नहीं दे पाये। उन्होंने कहा कि दीवार पर तो लिखने वाले ने गलत लिख दिया।
हमारे पूर्वज बांग्लादेशी, हम भारतीय-आरोपी बोले
बांग्लादेशियों के फर्जी पासपोर्ट बनाने के मामले में डबरा के बाद भोपाल, बैतूल, छिंदवाड़ा और पांढुर्ना के नाम सामने आए हैं। डबरा में 17, भोपाल के गोविंदपुरा से 40, बैतूल से 11 और छिंदवाड़ा-पांढुर्ना से एक-एक फर्जी पासपोर्ट बने। शुरुआत 2021-22 में डबरा से हुई। 2022-23 में अन्य जिलों से पासपोर्ट बने।
एसपी राजेश भदौरिया ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ में फर्जी दस्तावेज बनाने वालों के नाम मिले हैं, जिनकी तस्दीक हो रही है। डबरा थाने के तत्कालीन टीआई विनायक शुक्ला व सेल प्रभारी भूपेंद्र गुर्जर के नाम भी सामने आए हैं। आरोपियों ने पूछताछ में कुबूल किया है कि उनके पूर्वज बांग्लादेशी थे लेकिन वह लंबे समय से भारत में रह रहे हैं।