KMJ चिटफंड की प्रॉपर्टियों की नीलामी पर रोक लगाने से हाईकोर्ट का इंकार
ग्वालियर. मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर बेंच ने चिटफंड कम्पनी केएमजे लैंड एंड डवलपर्स इंडिया लिमिटेड की संपत्तियों की ई-नीलामी पर रोक लगाने मना कर दिया है। हाईकोर्ट के इस फैसले से कम्पनी द्वारा ठगे गये हजारों निवेशकों को बड़ी राहत मिली है। जो सालों से अपनी जमा राशि पाने का इंतजार कर रहे है। जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान साफ किया है कि कंपनी की सपित्तयों की ई-नीलामी की प्रक्रिया बिना किसी रूकावट के जारी रहेगी। हालांकि कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि नीलामी से मिलने वाली पूरी राशि एक राष्ट्रीयकृत बैंक के एस्क्रो अकाउंट में जमा कराई जाये और हाईकोर्ट की अनुमति के बिना किसी भी व्यक्ति या संस्था को राशि वितरित नहीं की जायेे।
क्या है पूरा मामला
यह मामला विशेष न्यायालय (निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम) ग्वालियर के 17 सितंबर 2022 के आदेश से जुड़ा है। विशेष न्यायालय ने राज्य सरकार और प्रशासन को निर्देश दिया था कि केएमजे कंपनी की संपत्तियों को कुर्क कर उनकी नीलामी की जाए और उससे प्राप्त राशि निवेशकों में वितरित की जाए।
इस आदेश को चुनौती देते हुए भूरेलाल और अन्य की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि कंपनी के खिलाफ SEBI का अंतरिम आदेश प्रभावी है और नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में कंपनी को बंद करने की प्रक्रिया लंबित है। ऐसे में ई-नीलामी पर रोक लगाई जानी चाहिए।
धनराशि की सुरक्षा हाईकोर्ट सख्त
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि नीलामी से प्राप्त पूरी राशि एस्क्रो अकाउंट में सुरक्षित रखी जायेगी। इस धनराशि का वितरण तभी होगा। जब होईकोर्ट इसकी अनुमति देगा। इससे निवेशकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है। गौरतलब है कि केएमजे चिटफंड कम्पनी पर निवेशकों से करोडों रूपये एकत्र करने और बाद में राशि वापिस नहीं करने के आरोप लगे हैं। मामले में वर्षो से कानूनी कार्यवाही चल रही है। बड़ी संख्या में निवेशक अपने पैसे की वापिसी का इंतजार कर रहे है।