जांच में हुआ खुलासा — ललितपुरा के सर्वे नंबर 243 से 247 तक की जमीन मूल रूप से शासकीय थी, फोरेंसिक जांच से बच रहे अफसर
1998 तक 31 बीघा जमीन सरकारी… इसके बाद बाग, नहर, पुल, सड़क सब हो गए निजी
ग्वालियर -जीवाजी यूनिवर्सिटी के लिए आवंटित की गई बागवानी तथा बॉडी रोड की जमीन को लेकर गंभीर गड़बड़ी का मामला सामने आया है। तहसीलदार की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ललितपुरा के सर्वे नंबर 243 से 247 तक की जमीन मूल रूप से शासकीय थी, लेकिन बाद में रिकॉर्ड में काट-छांट कर निजी नाम दर्ज कर दिए गए। 1940 -1990 तक- तैयार किए गए राजस्व अभिलेखों में बाग, नहर और पुल जैसी सार्वजनिक संपत्तियां दर्ज थीं। इनमें बाग 31 बीघा 53 विस्वा, भूमि पर स्थित था, जबकि नहर एवं सड़कें भी शासकीय भूमि के रूप में दर्ज थीं।
तहसीलदार ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया कि बाद में रिकॉर्ड में संशोधन कर इन संपत्तियों को निजी स्वामित्व में दर्शाया गया। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कुछ दस्तावेजों में हेरफेर कर भूमि उपयोग और स्वामित्व की स्थिति बदली गई।
यह है जमीन का मिसल बंदोबस्त रिकॉर्ड
यह है जमीन का मिसल बंदोबस्त रिकॉर्ड
सर्वे नंबर जमीन का ब्यौरा दर्ज स्थिति
243 17 बीघा पड़ी बंजर
244 12 बीघा बाग
245 18 बीघा 1 विस्वा नहर
246 11 बीघा 1 विस्वा पक्का कदम
247 2 बीघा 15 विस्वा नहर
इन रिकॉर्ड्स के अनुसार जमीन पर आम, जामुन, अमरूद, नीम, इमली, गूलर, मुर्रर सिंह भदौरिया, अर्जुन कपूर, दीपक संचेती सहित अन्य नाम दर्ज किए गए हैं। साथ ही यह भी सामने आया है कि इन भूमियों में बाद में प्लॉटिंग और निर्माण किए गए।
तहसीलदार ने लिखा — अभिलेखों में अलग स्याही, अलग लिखावट पर बढ़ाना चाहिए संदेह
तहसीलदार ने अपनी जांच रिपोर्ट में यह भी लिखा है कि वर्ष 2007, 2008 और 2009 के राजस्व अभिलेखों में अलग-अलग स्याही और लिखावट का उपयोग किया गया है, जिससे रिकॉर्ड में हेरफेर की आशंका और गहरी हो गई है। इस पूरे मामले को विस्तृत जांच का विषय बताया गया है।