ट्विटर से कंटेंट हटाने के अल्टीमेटम पर कंपनी पहुंची हाईकोर्ट, सरकार ने कहा- देश का कानून मानना पड़ेगा

 

नई दिल्ली. केंद्र सरकार और ट्विटर की लड़ाई अब कोर्ट तक पहुंच गई है. माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ने ट्विटर से कंटेंट हटाने के सरकार के आदेश को कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दी है. सरकार की तरफ से ट्विटर को 4 जुलाई तक का ‘आखिरी मौका’ दिए जाने के बीच कंपनी ने ये कदम उठाया है. सरकार ने ट्विटर को पिछले साल जनवरी और अप्रैल में बताए गए ट्वीट्स को ब्लॉक करने या दंडात्मक कार्रवाई का सामना करने को तैयार रहने को कहा था. ट्विटर के कोर्ट पहुंचने पर सरकार की तरफ से कहा गया है कि भारत में संचालित होने वाली सभी इंटरनेट कंपनियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे देश के नियम कानूनों का पालन करें.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मिनिस्ट्री ने जून में ट्विटर को लेटर भेजकर कहा था कि वह सरकार की तरफ से चिह्नित किए गए कंटेंट को साइट से हटा दे या फिर इंटरमीडिएरी के तौर पर उसे मिला ‘सुरक्षा कवच’ खतरे में पड़ सकता है. मिनिस्ट्री ने आईटी एक्ट की धारा 69(A) के तहत दिए गए ऐसे निर्देशों का पालन न करने पर ट्विटर के चीफ कंप्लायंस ऑफिसर के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने की चेतावनी भी दी थी. धारा 69A के तहत सरकार ऐसी पोस्ट और अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है, जो कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता हो या देश की संप्रभुता, अखंडता, सुरक्षा और विदेशी के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों के लिए खतरा बन सकता हो.