ग्वालियर में अब भी 200 सम्पत्तियों को डीआरडीई के विस्थापन का इंतजार
डीआरडीई की प्रतिबंधित सीमा में मौजूद सिटी सेंटर की 200 संपत्तियोंं को पूर्ण सुरक्षा के लिए अभी भी डीआरडीई की प्रयोगशाला के विस्थापन का काम अभी शुरू नहीं हुआ है। लगभग 8500 करोड़ रुपए की इन अचल संपत्तियों को सुरक्षित करने के लिए शासन ने महाराजपुरा डांग मौजे में 140 एकड़ भूमि हस्तांतरित हो चुकी है।
बीते वर्ष अगस्त में हस्तांरण की प्रक्रिया पूरी होने से पहले प्रशासनिक दल ने सीमांकन किया था। इसके बाद से करीब 6 महीने का समय पूरा हो चुका है फिर भी आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्र के सामान्य रहवासी और व्यवसाइयों को डीआरडीई की प्रयोगशाला के निर्माण के लिए रक्षामंत्री के हाथ से होने वाले भूमि पूजन का इंतजार है।
परिधि का हुआ परिसीमन
भूमि हस्तांतरण होने के बाद कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह के निर्देश पर एसडीएम सीबी प्रसाद की अगुवाई मेंं बनी समिति ने डीआरडीई की बाउंड्रीवॉल से 50 मीटर के दायरे में आने वाली संपत्तियों आकलन करके प्रतिवेदन बना लिया था। यह रिपोर्ट भी कलेक्टर के पास पहुंच गई है। इस प्रतिवेदन में सिर्फ 34 निजी और 16 सरकारी संपत्तियों को बाउंड्रीवॉल की परिधि के क्षेत्र में बताया गया था। परिधि में मौजूद शासकीय संपत्तियों में तरण पुष्कर, बाल भवन, रूपसिंह स्टेडियम, नगर निगम कार्यालय, शासकीय वनवानिकी विभाग, रेलवे ट्रैक, रेलवे ब्रिज, पांच सरकारी बंगले, एफसीआई गोदाम, फायर ब्रिगेड स्टेशन, नगर निगम स्टोर आदि शामिल हैं।
इसलिए बढ़ रहा इंतजार
भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास स्थापना (डीआरडीई) की प्रयोगशाला के लिए महाराजपुरा में 140 एकड़ भूमि की हस्तांतरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण के लिए भूमि पूजन होना है। यह भूमि पूजन रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के हाथों से कराए जाने की बात की जा रही है। इसके लिए बीते वर्ष से अभी तक दो बार रक्षामंत्री के आने की सुगबुगाहट हुई लेकिन यह सिर्फ हवाई साबित हुई। अब फिर से भूमि पूजन कराने को लेकर रक्षामंत्री द्वारा समय दिए जाने की प्रतीक्षा की जा रही है।