ठाठीपुर पुर्नघनत्वीकरण- 79 पेड़ काटे जायेंगे 329 पेड़ को अन्यत्र ट्रांसफर के बदले 4580 लगायेंगे
ग्वालियर. ठाठीपुर पुर्नघनत्वीकरण प्रोजेक्ट पिछले 15 सालों से प्रस्तावित चल रहा इस बाल भी उलझ गया है। नोडल एजेंसी हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों की बेतरतीव प्लानिंग का नतीजा यह है कि टेण्डर कॉल करने के बाद भी इस प्रोजेक्ट में कोई कंस्ट्रक्शन कंपनी काम करने का मन नहीं बना पा रही है।
ठसलिये अभी तक न तो कंस्ट्रक्शन कंपनी ही सामने आयी है और न क्वार्टर तोड़ने के लिये कोई ठेकेदार, वही, हाईकोर्ट द्वारा दिये गये आदेशों के बाद कंपनियों का मानना है कि स्थानीय लोगों के विवाद और प्रक्रिया के कारण करोड़ों रूपये फंस सकता है। इसलिये कंस्ट्रक्शन कंपनियां इससे दूरी बनाती दिखाई दे रही है।
2018 से अब तक टेंडर ही नहीं हो पाए
2006-07: 30 हेक्टेयर सरकारी जमीन पर योजना को मूर्तरूप देने की प्लानिंग हुई।
2008: प्रारंभिक चरण में 18 हेक्टेयर जमीन पर ठेकेदार को 1010 आवास बनाने थे, जिसके लिए टेंडर हुए व ठेकेदार कंपनी ने 5 करोड़ की धरोहर राशि भी जमा कर दी।
2010: धरोहर राशि जमा करने के बाद भी कंपनी ने काम शुरू नहीं किया गया। शासन स्तर पर सख्ती होने के बाद कंपनी द्वारा यह मामला सुप्रीम कोर्ट ले जाया गया।
2015: सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिए कि प्रदेश सरकार की साधिकार समिति ठेकेदार कंपनी की बात सुनकर निर्णय करे।
2016: साधिकार समिति ने सुनवाई करते हुए नवंबर में ठेकेदार कंपनी की अपील को खारिज कर दिया।
2018: मई में साधिकार समिति ने तीन चरणों में इस योजना पर काम करने की स्वीकृति दे दी।
2018: अगस्त में हाउसिंग बोर्ड ने पहले चरण के लिए 10 सितंबर 2018 तक टेंडर मांगे, लेकिन कंपनियों के आगे न आने पर इस प्रक्रिया को 25 सितंबर तक बढ़ाया गया। तब भी कोई कंपनी टेंडर डालने नहीं आई।
2019: फरवरी में हाउसिंग बोर्ड ने फिर पहले चरण के टेंडर कॉल किए, जिसमें 8 मार्च तक समय दिया, लेकिन कोई कंपनी नहीं आई।
2021: हाउसिंग बोर्ड ने खुद 6 हेक्टेयर जमीन पर काम की शरुआत करने का एलान किया। टेंडर भी कॉल किए, लेकिन अब तक कुछ नहीं हो सका।
अब 13 हेक्टेयर में ही होगा निर्माण
पहले 30.06 हेक्टेयर में से 18 हेक्टेयर जमीन पर प्लानिंग की गई थी, लेकिन विरोध के बाद हाईकोर्ट से हुए आदेश के बाद अब सिर्फ 13 हेक्टेयर जमीन पर प्रोजेक्ट सिमट गया है।
हाई कोर्ट ने कहा कि प्रोजेक्ट कंस्ट्रक्शन की कार्रवाई निर्धारित समय में पूरी की जाए और कंस्ट्रक्शन की हर 3 महीने में रिपोर्ट हाईकोर्ट के प्रिसिंपल रजिस्ट्रार के पास प्रस्तुत की जाए।
हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों का यदि उल्लंघन होता है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
जो 79 पेड़ काटे जाने हैं, उनके एवज में निकटवर्ती क्षेत्र में 10 गुना यानी कि 790 पेड़ लगाए जाएं। ट्रांसप्लांट किए जाने वाले 329 पेड़ों के एवज में 3 हजार 290 पेड़ अलग से लगाएं। साथ ही निर्माण स्थल पर 500 नए पौधे लगाए जाएं।