आन्दोलनकारियों पर जिला प्रशासन दमनात्मक कार्यवाही कर रहा है हम इससे दबने वाले नहीं-अखिलेश यादव
ग्वालियर संविधान द्वारा प्रदत्त लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत आन्दोलन किया जाता है तो प्रशासन द्वारा आन्दोलनकारीयों पर दमनात्मक कार्यवाही की जा रही है। लोकतंत्र में जिला प्रशासन की यह गतिविधि पुर्णतः अलोकतांत्रिक एंव जनवादी अधिकारों को खुला उल्घंन है।
एैसा ही ज्वलतं मामला डबरा क्षेत्रान्तर्गत ग्राम काशीपुर निवासी गुलाबसिंह रावत के साथ घटित हुआ है। वे ग्वालियर जिला पंचायत सदस्य है एवं अपने क्षेत्र के लोकप्रिय जनप्रतिनिधी है। जैसा कि आप सब जानते है कि केन्द्र सरकार द्वारा किसान विरोधी 3 कृषी कानून लागू किया जा रहा हैए जिसके खिलाफ पूरे देश का किसान पिछले 11 महिने से आन्दोलनरत है। दिल्ली की सीमाओं पर भी किसान 11 महिने के बैठा हुआ है। करीब 700 ज्यादा किसान शहीद हो चुकें है। अभी हाल ही में लखीमपुर खीरी में मंत्री पुत्र द्वारा किसानों को गाडी से कुचल देने की दर्दनाक घटना भी घटित हो चुकी है।
इन कृषी कानूनों को निरस्त कराने की मांग को लेकर देश भर के साथ साथ ग्वालियर के किसान भी आन्दोलनरत है। देश भर संयुक्त किसान आन्दोलन के आव्हानों को ग्वालियर में भी पूरी शिद्दत से पूरा किया जाता रहा है। ट्रेक्टर मार्च से लेकर अन्य आन्दोलनों को ग्वालियर में शानदान रूप से किसानों ने लागू किया है ग्वालियर के फूलबाग चैराहे पर आयोजित 49 दिवसीय धरना भी आयोजित किया गया है। एक जनप्रतिनिधी होने के नाते गुलाब सिंह भी इन ग्वालियर और डबरा में हुए आन्दोलनों में सक्रिय रूप से भाग लेते रहें है। इससे चिढकर जिला प्रशासन द्वारा इसका शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने की कार्यवाही की गई है एवं पुलिस के वरिष्ठ अधिकारीयों द्वारा मौखिक रूप से आन्दोलन में शामिल ना होने की धमकिया दी जा रही है। शस्त्र लाइसेंस निरस्त्रीकरण का जिला कलेक्टर के पत्र की भाषा को और भी आप्त्तीजनक है। संभवतः देश में यह अपने तरह का पहला मामला हो।
अखिल भारतीय किसान सभा इस दमनात्मक कार्यवाही पर अपना तीव्र असंतोष व्यक्त करती है एवं जिला प्रशासन को चेतावनी देती है कि किसान आन्दोलन से जुडे किसी भी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ इस प्रकार की दमनपूर्ण नीति बर्दाश्त नही की जायेगी। जबकि गुलाब सिंह का कहना है कि उनके खिलाफ आज तक कोई भी अपराधिक प्रकरण पंजीबद्व नही है। जिला प्रशासन द्वारा प्रशासन की होगी। श्री रावत ने यह भी संकल्प व्यक्त किया है कि प्रशासन की इन धमकियों से डरने वाले नही है बल्कि वे किसान आन्दोलन में बढचढ कर हिस्सेदारी करेगें। किसान सभा इसके खिलाफ 22 अक्टूबर को संभागीय आयुक्त को ज्ञापन देगी। अगर शस्त्रनिरत्रीकरण का आदेश वापिस नही लिया गया तो आन्दोलन भी शुरू किया जायेगा।