रात को हुई थी पत्नी की भतीजी की मौत, सुबह गमी में न जाकर टीका लगवाने पहुंचा जेएएच

वैक्सीन को लेकर रघुवीर के जज्बे को पूरा शहर सलाम कर रहा है, इसलिए नहीं कि उसने जिले का पहला टीका लगवाया है, बल्कि ऐसी परिस्थिति में लगवाया है कि वह चाहता, तो मना कर सकता था। दरअसल, रघुवीर की पत्नी ममता की भतीजी आरती की शुक्रवार रात मौत हो गई। सुबह उसे परिवार के साथ गमी में शामिल होना था, लेकिन वह बेटी विशाखा और भाभी आशाबाई के साथ जेएएच के वैक्सीनेशन सेंटर पर पहुंच गया, जबकि पत्नी को उसके मायके गमी में भेज दिया। वैक्सीनेशन के बाद वह खुद भी परिवार के दुख में शामिल हुआ। लोगों का कहना है कि वह चाहता, तो गमी के नाम पर टीका लगवाने से बच सकता था।

रघुवीर ने दैनिक भास्कर से कहा, उसका मकसद पहला टीका लगवाना नहीं था। वह चाहता था, कोरोना को जड़ से उखाड़कर फेंक दिया जाए, क्योंकि वायरस के कारण कई गरीब परिवार बीते 10 महीने में तिल-तिल कर मरे हैं। न जाने कितने भाइयों को काम छोड़कर सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर घर उदास लौटना पड़ा। न जाने कितने लोग बेघर हो गए। कहीं मां ने अपना बेटा खोया, तो कहीं बेटे ने मां को खोया है। जिसे यह वायरस लग जाता था, उसका कुछ दिन तक समाज से मानो बहिष्कार हो जाता था। यह दिन मैंने भी देखे हैं। अस्पताल में रहा हूं, तो समझता हूं कि वायरस को खत्म करना कितना जरूरी है, इसलिए गमी में न जाकर वैक्सीन लगवाने पहुंचा हूं।

नहीं तो अफवाह फैलती, अन्य भी डरते

रघुवीर ने कहा है, यदि वह नहीं आता और ससुराल गमी में चला जाता, तो अफवाह फैलती कि वैक्सीन के डर से बहाना कर दिया। इससे अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों को भी डर लगता, इसलिए टीका लगवाना और लोगों को संदेश देना जरूरी था। रघुवीर ने वैक्सीनेशन में भाग लेने के साथ ही स्वास्थ्य कर्मचारी होने की जिम्मेदारी निभाई है। टीका लगवाने के बाद सीधे गमी में पहुंचकर परिवारिक जिम्मेदारी भी निभाई।

बेटी बोली- गर्व है पिता पर

वैक्सीनेशन सेंटर के बाहर रघुवीर की बेटी विशाखा ने बताया कि उसे पिता पर गर्व है। उन्होंने ऐसे हालात में भी अपने परिवार से ज्यादा शहर के बारे में सोचा।