शीतला माता मंदिर दुर्घटना की मजिस्ट्रियल जांच शुरू, 7 दिन में पेश करनी होगी रिपोर्ट
ग्वालियर. शीतला माता मंदिर परिसर में भीषण सड़क दुर्घटना की मजिस्ट्रिल जांच शुरू हो गयी है। कलेक्टर रूचिका चौहान ने जांच का दायित्व एडीएम सीबीप्रसाद को सौंपा है। उन्हें 7 दिन में जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
बुधवार से घटना से अधिकारियों-कर्मचारियों और अन्य लोगों के बयान दर्ज किये जायेंगे। जांच में यह भी पता लगाया जायेगा कि प्रतिबंधित रास्ते पर भारी ट्रक कैसे पहुंचे। उन्हें प्रवेश किसने दिया और घटना के समय सुरक्षा व्यवस्था के लिये किसकी तैनाती थी। हादसे में अभी तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 41 लोग घायल है। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर कार्यवाही की जा सकती है।
बैरिकेडिंग की भी जांच होगी
मजिस्ट्रियल जांच के लिये घटना के कई अहम बिंदु तय किये गये है। इनमें दुर्घटना की मूल वजह, चीनौर घाटी की तरफ से भारी ट्रकों के मंदिर मार्ग तक पहुंचने की परिस्थितियां और प्रवेश की अनुमति देने वालों की भूमिका शामिल है। जांच अधिकारी यह भी पता लगायेंगे कि घटना के वक्त मौके पर कितने पुलिसकर्मी और प्रशासनिक कर्मचारी तैनात थे। किस की कहां ड्यूटी थी। सुरक्षा व्यवस्था के लिये कितने बल की तैनाती की गयी थी।
17 अक्टूबर की रात बेकाबू ट्रक ने 57 लोगों को कुचला
ग्वालियर के सातऊ गांव की पहाड़ियों के बीच स्थित मां शीतला मंदिर में 17 अक्टूबर की रात करीब 1:30 बजे हादसा हुआ था। सप्तमी के अवसर पर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। इसी दौरान चीनौर की ओर से ढलान पर दो भारी ट्रक आए। बताया गया है कि एक ट्रक के चालक ने ढलान पर वाहन रोक लिया, लेकिन दूसरा चालक ट्रक को नियंत्रित नहीं कर सका।
बेकाबू ट्रक भीड़ की ओर बढ़ा और 57 लोगों को अपनी चपेट में लेते हुए मंदिर के प्राचीन मुख्य दरवाजे से टकरा गया। हादसे में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है और 41 लोग घायल हुए हैं। दो गंभीर घायलों को एयर एम्बुलेंस से भोपाल एम्स में भर्ती कराया गया है। अब मजिस्ट्रियल जांच में हादसे की परिस्थितियों, सुरक्षा इंतजामों और संभावित लापरवाही की कड़ियां जोड़ी जाएंगी। सात दिन में आने वाली रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि दुर्घटना के लिए कौन जिम्मेदार था और भारी ट्रक को मंदिर मार्ग तक पहुंचने से रोकने में कहां चूक हुई।