NHAI की 32km सड़क पर मिले 28 गड्डे, डामर की परत 50mm की जगह कहीं तो 25-26 तो कहीं 40mm मिली
ग्वालियर. शहर की सड़कोुं की खस्ताहाली के लिये बदनाम ग्वालियर अब नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के हाइवे को लेकर भी चर्चाओं में हे। ग्वालियर बायपास एनएच-44 पर मेहरा टोल प्लाजा से लेकर सिकरौदा तिराहा तक के लिये गये हाइवे के सैम्पल फेल हो गये है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद 3 स्पॉट पर सैम्पल लेकर हाइवे की सड़क की क्वालिटी को परखा गया था। रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की गयी है। जिसमें नेटवर्क सर्वे व्हीकल (एनएसवी) की रिपोर्ट में चौकाने वाला सच सामने आया है।
मेहरा टोल से सिकरोदा तिराहे के बीच आने-जाने की दूरी 32 किमी है। इस सड़कपर 28 गड्ढें मिले है। नेशनल हाइवे की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) में हाइवे की सबसे ऊपरी डामर की परत की मोटाई 50एमएम तय की गयी थी। लेकिन लैब टेस्टिंग में अलग-अलग स्ािानों पर यह 25एमएम से 40 एमएम ही पायी गयी। हाइवे (ग्वालियर बायपास) पर 3 पाइंट मायसेम ग्रीन बिल्डिंग के पास हाइवे की ऊपरी परत 25 mm, गोल्डन ट्री रेस्टोरेंट के पास 26 mm, और सिकरोदा तिराहे पर 40 mm मिली है।
DPR में ही धांधली
आयोग और तकनीकी टीम द्वारा अलग-अलग स्थानों पर खुदाई कर जब नमूनों लेकर जांच की गई, तो कई बड़े खुलासे हुए हैं। ग्वालियर बायपास की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) और अनुबंध के मानकों की धज्जियां उड़ती मिलीं है।
बिटुमिनस कंक्रीट (BC Layer)
डीपीआर के अनुसार सड़क की ऊपरी परत 50 mm होनी चाहिए थी। यह परत डामर की होती है, हालांकि, लैब टेस्टिंग में अलग-अलग स्थानों पर यह महज 25 mm से 40 mm ही पाई गई।
हाईकोर्ट से गठित टीम ने ग्वालियर बायपास (नेशनल हाइवे) पर 3 पॉइंट में सैंपल लिए थे। जब यह सैंपल की रिपोर्ट आई तो बड़ा घोटाला नजर आया है। मानक से आधी मोटाई की परत मिली है।
मायसेम ग्रीन बिल्डिंग के पास सैंपल लिया गया था। डीपीआर में यहां 50mm की डामर की परत होनी थी पर 25 mm निकली।
दूसरा सैंपल गोल्डन ट्री रेस्टोरेंट के पास से लिया गया था। यहां भी 50 mm की परत की जगह 26 mm मिली है।
तीसरा पॉइंट सिकरोदा तिराहा था जहां सैंपलिंग की गई। यहां भी सड़क की ऊपरी परत की मोटाई 50 mm की जगह 40 mm) मिली।