सरकार की अनुमति के बिना अधिकारियों पर केस नहीं होगा, हाईकोर्ट के आदेश बाद पीएचक्यू ने लिया निर्णय, लोकायुक्त में अनुमति के लिये 295 केस लंबित

भोपाल. प्रदेश में अब अधिकारियों, खासकर राजपत्रित अधिकारियों के खिलाफ सरकारी कामकाज से जुड़े अधिकारियों के मामलों में सरकार की अनुमति के बगैर आपराधिक केस दर्ज नहीं किये जायेंगे। ऐसे अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही करने से पहले तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। यदि किसी सरकारी अधिकारी पर उसके आधिकारिक काम के दौरान किये गये कार्य का लेकर शिकायत होती है तो ऐसे मामले में अदालत की तरफ से संज्ञान लेने से पहले राज्य शासन से अभियोजन स्वीकृति लेना आवश्यक होगा। दूसरी तरफ, सरकार की तरफ से अभियोजन स्वीकृति देने की स्थिति देखे तो पता चलता है कि अकेले लोकायुक्त के 295 मामलों में राज्य सरकार ने अभियोजन की मंजूरी नहीं दी है।
पुलिस मुख्यालय के अपराध अनुसंधान विभाग (पीएचक्यू) ने प्रदेश की सभी पुलिस इकाईयां का इस संबंध में निर्देश जारी किये हैं। इसमें हाईकोर्ट ग्वालियर खंडपीठ के 19 जुलाई 2026 के आदेश का हवाला दिया गया है। दरअसल, हाईकोर्ट ने एक सरकारी अधिकारी के खिलाफ बिना आवश्यक अभियोजन स्वीकृति के दर्ज शिकायत पर अदालत द्वारा संज्ञान लेने के आदेश को निरस्त कर दिया था। इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने प्रदेश की पुलिस इकाईयों को इस आदेश और संबंधित कानूनी प्रावधानों का पालन करने के निर्देश दिये है।
किन मामलों लेना होगी मंजूरी
यदि कोई राजपत्रित अधिकारी अपने सरकारी पद की जिम्मेदारी निभाते समय कोई ऐसा काम करता है, जिसे लेकर उसके खिलाफ आपराधिक शिकायत की जाती है। वह मामला उसके आधिकारिक कामकाज से जुड़ा है तो अदालत में आगे की कार्यवाही से पूर्व शासन की अनुमति जरूरी हो सकती है। इस सबंध में में पहले दंड प्रक्रिया संहिता (बीएनएसएस) की धारा 2023 की धारा 218 में किया गया है।
लोकायुक्त को 295 मामलों में नहीं मिली है अभियोजन स्वीकृति दूसरी ओर, सरकार द्वारा अधिकारियों के विरुद्ध केस चलाने की अभियोजन स्वीकृति देने के मामले की बात करें तो पता चलता है कि अकेले लोकायुक्त पुलिस के पास 295 मामले इसलिए पेंडिंग हैं, क्योंकि सरकार इन मामलों में अभियोजन की स्वीकृति नहीं दे रही है। इसमें IAS, IPS और राज्य के राजपत्रित कैडर के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं। विभागवार अभियोजन के लिए पेंडिंग केस की जानकारी के अनुसार, अभियोजन स्वीकृति की शासन स्तर पर पेंडेंसी इस तरह है।
नगरीय विकास एवं आवास – 36, पंचायत एवं ग्रामीण विकास – 15, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण – 12, सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) – 11, लोक निर्माण विभाग – 10, राजस्व विभाग – 6, जल संसाधन विभाग – 5, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण – 5
वन विभाग – 5, जनजातीय कार्य विभाग – 4, महिला एवं बाल विकास – 4, सहकारिता विभाग – 2, किसान कल्याण तथा कृषि विकास – 2, गृह विभाग (पुलिस) – 2, वाणिज्यिक कर विभाग – 2