हरसी बांध से पहुंचा खेतों में पानी, मणिखेड़ा से पहुंचा हरसी बांध में पानी, विधायक ने नहरों के खुलवाये गेट
ग्वालियर. भितरवार स्थित हरसी बांध से सिंचाई के लिये मणिखेडा परियोजना से पानी छोड़ दिया गया है। विधायक मोहनसिंह राठौड़ और किसानों ने 31 जुलाई का हरसी बांध पर पहुंचकर इलाके की फसलों के लिये नहरों में पानी का प्रवाह शुरू करवाया है। किसान लंबे समय से बांध में पानी छोड़े जाने की मांग कर रहे थे।
कम वर्षा और जल संकट से जूझ किसान
इस वर्षा कम वर्षा होने की वजह से हरसी बांध में पर्याप्त पानी इकट्ठा नहीं हो पाया था। जिसके चलते किसानों के सामने सिंचाई का गंभीर संकट खड़ा हो गया था। इलाके के किसान लगातर बांध से पानी की मांग कर रहे थे। एमएलए मोहनसिंह राठौड ने कहा है कि इस समस्या के समाधान के लिये वह लगातार और शासन स्तर पर प्रयास कर रहे थे। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और विभाग के उच्चाधिकारियों से पत्रों और फोन के माध्यम से लगातार संपर्क साधा था। पानी मिलने के बाद विधायक ने सीएम मोहन यादव, केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और तुलसीराम सिलावट के प्रति आभार जताया है।
हरसी बांध से जुड़ी खास बातें
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
हरसी बांध एशिया का पहला मिट्टी का बांध है। इसकी शुरुआत 1928 में हुई थी और यह 1935 में बनकर तैयार हुआ था। इसका निर्माण तत्कालीन ग्वालियर रियासत के महाराज जीवाजी राव सिंधिया ने 78 लाख रुपए की लागत से करवाया था।
सिंचाई क्षमता
इस बांध से वर्तमान में 65,000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है और यह डबरा व भितरवार क्षेत्र की फसलों के लिए पानी का मुख्य स्रोत है।
वर्तमान जल स्तर
इस समय बांध अपनी क्षमता का 61.13 प्रतिशत भरा हुआ है। बांध का कुल जलस्तर 869.20 फीट है, जिसमें अभी 858.60 फीट पानी मौजूद है। जबकि पिछले साल इस अवधि तक बांध पूरी तरह ओवरफ्लो हो चुका था।