बिलौआ-रफादपुर की 16 खदानों पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, हाईकोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा-जनता के टैक्स के पैसा वेतन लेकर माफिया का काम कर रहे
ग्वालियर. बिलौआ-रफादपुर इलाके में अवैध उत्खनन और करोड़ों रूपये की रॉयल्टी -पेनल्टी वसूली से जुड़े मामले में गुरूवार को हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की डबल बेंच ने 16 खदानों में तत्काल प्रभाव से खनन पर रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने अधिकारियों की कार्यप्रणली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि सरकारी अधिकारी जनता के टैक्स से वेतन लेते हैं। लेकिन काम माफिया के हित में कर रहे है। सुनवाई के बीच हाईकोर्ट ने पाया कि डबरा एसडीएम रूपेश रतन सिंघई ने बिना जमीनी जांच के न्यायालय में भ्रामक रिपोर्ट पेश की है। इसे गंभीर मानते हुए उनके खिलाफ अवमानना (कंटेप्ट) की कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिये गये। वहीं अवैध खनन रोकने की व्यक्तिगत जिम्मेदारी ग्वालियर कलेक्टर रूचिका चौहान को सौंपी गयी है।
कुंभकर्णी नींद में अफसर
हाईकोर्ट ने यह भी माना कि वर्ष 2017 में जारी करोड़ों रुपए की रॉयल्टी और पेनल्टी के नोटिस पर नौ साल बाद भी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। इस पर अदालत ने अधिकारियों को “कुंभकर्णी नींद” में बताया और कार्रवाई में देरी पर सवाल उठाए। सुनवाई के दौरान कलेक्टर रुचिका चौहान ने बताया कि सभी ई-चेक पोस्ट पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। जब हाईकोर्ट ने फुटेज की निगरानी के बारे में पूछा तो माइनिंग अधिकारी ने स्वीकार किया कि नियमित मॉनिटरिंग नहीं होती।
इस पर कोर्ट ने सभी ई-चेक पोस्ट के डीवीआर और सीसीटीवी फुटेज जब्त कर 17 जुलाई को सीलबंद लिफाफे में पेश करने के आदेश दिए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि कोई फुटेज गायब मिला तो इसे सबूत मिटाने की साजिश माना जाएगा। हाईकोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि नो-ड्यूज प्रमाणपत्र के बिना कई खदानों की लीज का नवीनीकरण कैसे कर दिया गया। मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई को होगी, जिसमें प्रशासन को कार्रवाई रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।