पदोन्नति में आरक्षण में फिर नये सिरे से होगी सुनवाई, इंतजार कर रहे दोनों पक्षों का बड़ा झटका
जबलपुर. मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के पदोन्नति में आरक्षण को लेकर लम्बे समय से फैसले का इंतजार कर रहे लाखों कर्मचारियों -अधिकारियों को बड़ा झटका लगा है। इस मामले में पूर्व मुख्य न्यायाधीश की पीठ द्वारा सुरक्षित रखा गया फैसला अब सुनाया नहीं जायेगा। अब मामले की सुनवाई मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की नयी बेंच में शुरू से होगी। दरअसल, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव कुमार सचदेवा की बेंच ने इस बहुचर्चित मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 17 फरवरी को फैसला सुरखित रख लिया था।
हालांकि, फैसला सुरक्षित रखने के बाद निर्धारित समय -सीमा में निर्णय नहीं सुनाया जा सका और इस दौरान जस्टिस सचदेवा का ट्रांसफर सुप्रीम कोर्ट में हो गया। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, किसी भी सुरक्षित फैसले का सामान्यतः 90 दिनों के भीतर सुनाया जाना चाहिये। चूंकि इस अवधि में फैसला नहीं सुनाया गया। इसलिये अब पूर्व बेंच द्वारा सुरक्षित रखा गया निर्णय प्रभावी नही रहेगा।
नये सिरे से सुनवाई करेगा हाईकोर्ट
अब इस मामले की सुनवाई मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस विवेक रूसिया की बेंच के समझा नये से होगी। इसका मतलब है कि सभी पक्षों का फिर से अपने-अपने तर्क और दस्तावेज हाईकोर्ट के समक्ष पेश करना होंगे। मामले में पक्षकार रहे सपाक्स और अजाक्स समेत अन्य संगठनों के अधिवक्ताओं को भी दोबारा विस्तृत बहस करनी पडेगी। ऐसे में पदोन्नति में आरक्षण पर अंतिम फैसला आने में अभी और समय लग सकता है। यह मामला मध्यप्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति में जुड़ा होने की वजह से लम्बे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। अभी सभी की निगाहें नयी बेंच की सुनवाई और उसके अंतिम निर्णय पर टिकी है।