सरकारी जमीन बेंचने पर 3 भूमाफियाओं पर दर्ज की गयी FIR
ग्वालियर. शहर के जनकगंथ थाना इलाके के अंतर्गत आने वाले ग्राम कोटा (लश्कर) में करोड़ों रूपये की सरकारी भूमि को फर्जीवाड़ा कर खुर्द-बुर्द करने का एक मामला सामने आया है। बेखौफ भूमाफिया नेअपनी निजी जमीन के रकबे की आड़ में शासन की बेशकीमती जमीनों पर अवैध रूप से प्लॉटिंग कर दी और उसे छो-छोटे टुकड़ों में आम लोगों को बेंच दी और इतना ही नहीं, खरीदरों को सरकारी जमीन पर पक्के मकान भी बनवा कर दे दिये। पटवारी की लिखित शिकायत पर प्रशासनिक जांच के बाद पुलिस ने 3 मुख्य कॉलोनाइजरों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।
निजी जमीन तो झांकी थी असली खेल को सरकारी रकबे का था
प्रशासनिक जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपियों के पास ग्राम कोटा में कुछ निजी भूमि थी। लेकिन पैसोें के लालच में भू-माफिया ने अपनी तयशुदा निजी जमीन के दायरे में कई गुना अधिक जमीन के प्लॉट बेच दिये। जब निजी जमीन खत्म हो गयी तो आरोपियों ने उसके आसपास स्थित सरकारी जमीनों पर कब्जा कर वहां बाउंड्रीवॉल खड़ी कर दी और लोगों को धोखे में रखकर रजिस्ट्री कर दी।
इन सर्वे नंबरों को बनाया निशाना
पटवारी की जांच में सामने आया कि भू-माफियाओं ने ग्राम कोटा (लश्कर) की शासकीय भूमि सर्वे क्रमांक 1703, 1704, 1706, 1707, 1708 और 1709 पर पूरी तरह अवैध रूप से कब्जा किया। खसरे और नक्शे का मिलान करने पर पता चला कि रिकॉर्ड में जो जमीन पूरी तरह मध्य प्रदेश शासन के नाम दर्ज थी, धरातल पर वहां आलीशान पक्के मकान खड़े हो चुके हैं।
तहसीलदार कोर्ट में बेदखली का केस शुरू
भू-माफिया के झांसे में आकर जिन आम लोगों ने अपनी जीवनभर की गाढ़ी कमाई लगाकर इन प्लॉटों पर मकान बना लिए हैं, अब उनके आशियानों पर भी कानूनी तलवार लटक गई है। पटवारी द्वारा पुलिस को सौंपे गए आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, इस सरकारी जमीन को खरीदकर मकान बनाने वाले सभी भवन मालिकों के खिलाफ तहसीलदार न्यायालय (लश्कर) में शासकीय भूमि पर अवैध अतिक्रमण का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। कोर्ट के आदेश के बाद इन अवैध निर्माणों पर प्रशासन का बुलडोजर चलना तय माना जा रहा है।
जनकगंज थाना पुलिस ने बताया कि राजस्व विभाग और पटवारी की रिपोर्ट पर तीन कॉलोनाइजर मुकेश सिंह, छत्तू उर्फ छत्रपाल और लक्ष्मण सिंह कुशवाह के खिलाफ शासकीय भूमि पर अवैध कॉलोनी काटने, फर्जीवाड़ा करने और धोखाधड़ी की धाराओं के तहत मामला पंजीबद्ध कर लिया गया है। आरोपियों ने शासन की करोड़ों रुपए की बेशकीमती जमीन को अवैध रूप से बेचा है।