हिन्दी पत्रकारिता की गौरवशाली परंपरा से युवा प्रेरणा लें : राज्यपाल श्री पटेल
राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता का प्रारंभिक काल अत्यंत चुनौती पूर्ण था। कर्मठ पत्रकारों ने ब्रिटिश हुकूमत की अनेक कठिनाईयों के बावजूद पत्रकारिता के आदर्शों और शुचिता को बनाए रखा। हिन्दी पत्रकारिता की इसी गौरवशाली परंपरा से युवा पीढ़ी को प्रेरणा लेनी चाहिए।
राज्यपाल श्री पटेल बुधवार को "हिन्दी पत्रकारिता द्वि-शताब्दी महोत्सव, पुरखों को प्रणाम : पोस्टर प्रदर्शनी" कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। पोस्टर प्रदर्शनी का आयोजन माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान द्वारा किया गया है। राज्यपाल ने महान पूर्वजों के स्मरण की अनुकरणीय पहल के लिए संस्थान को बधाई और साधुवाद दिया। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे।
राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि ऐतिहासिक हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं और युग निर्माता संपादकों की पोस्टर प्रदर्शनी, पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी तक ले जाने का प्रेरक प्रयास है। प्रदर्शनी का आयोजन, राष्ट्र धर्म और जन सेवा के लिए जीवन समर्पित करने वाले युग निर्माता संपादकों के त्याग और समर्पण को सजीव कर दर्शक का मन उन सभी महान विभूतियों की साधना और समर्पण के प्रति आदर भाव से भर देता है।
राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि पत्रकारिता कोई साधारण व्यवसाय नहीं, यह समाज के प्रति उत्तरदायित्व, सत्य के प्रति निष्ठा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक है। गौरव की बात है कि हिन्दी पत्रकारिता ने अपने आरंभ से ही समाचार प्रसार की सीमाओं से आगे बढ़कर कार्य किया। समाज के दिशा दर्शन, जनमत को सशक्त बनाने तथा राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने का सशक्त प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि स्वाधीनता आंदोलन के कठिन दौर में भी हिन्दी पत्रकारिता ने जन जागरण, सामाजिक सुधार और राष्ट्रीय एकता को मज़बूत करने में कारगर भूमिका निभाई है। यही कारण है कि हिन्दी पत्रकारिता का योगदान केवल स्वतंत्रता संग्राम तक सीमित नहीं रहा उसने विशाल पाठक वर्ग तैयार कर ज्ञान का प्रसार भी है।