प्रदेश के चहुँमुखी विकास, जन-कल्याण और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए 21 हजार 485 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक हुई। बैठक में प्रदेश के चहुंमुखी विकास, जन-कल्याण और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए 21 हजार 485 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई। साथ ही प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण के लिए ऐतिहासिक एवं दूरगामी निर्णय लिए गए। मंत्रि-परिषद ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए 'स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026' के तहत स्टॉम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क को पूरी तरह माफ करने का फैसला किया है, जिसका संपूर्ण 3800 करोड़ रूपये का वित्तीय भार राज्य शासन द्वारा वहन किया जायेगा। इसके साथ ही प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत 17 हजार 59 करोड़ रूपये की राशि स्वीकृत की गई, जिससे नए चिकित्सा महाविद्यालयों के निर्माण और एमबीबीएस तथा पीजी सीटों में बढ़ोतरी का मार्ग प्रशस्त होगा।

बैठक में ग्रामीण विकास और वित्तीय सुधारों को गति देने के लिए 'मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम' तथा 'मध्यप्रदेश उपकर अधिनियम' में संशोधन संबंधी अध्यादेशों के प्रारूपों को मंजूरी दी गई। वहां, स्कूली शिक्षा में पारदर्शिता लाने के लिए सत्र 2026-27 में कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को निविदा प्रक्रिया के माध्यम से सिली-सिलाई गणवेश प्रदाय करने का निर्णय लिया गया। इसके अतिरिक्त इंदौर जिला न्यायालय भवन के पुनरीक्षित लागत, बरगी जलाशय हादसे की न्यायिक जांच के लिए आयोग गठन के निर्णय का अनुसमर्थन तथा 2 प्रमुख फिल्मों को एस.जी.एस.टी. से छूट देने जैसे महत्वपूर्ण फैसलों पर मंत्रि-परिषद द्वारा मुहर लगाई गई। ये सभी निर्णय राज्य में बुनियादी ढांचे के विस्तार और पारदर्शी शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना 2026 को स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026 की स्वीकृति दी है। मंत्रि-परिषद द्वारा निर्णय लिया गया है कि प्रदेश में स्वामित्व योजना में जिन भू-खण्डधारियों के अधिकार अभिलेख निर्मित किए गए हैं उन्हें आसानी से ऋण उपलब्ध कराने के लिए इन निर्मित अधिकार अभिलेखों का पंजीयन कराया जाए। इसके लिए डीड ऑफ कन्वेयेंस का निष्पादन एवं पंजीयन किया जाएगा ताकि नागरिक आवश्यकतानुसार गृह निर्माण, व्यवसाय एवं कृषि संक्रियाओं आदि के लिए ऋण प्राप्त कर अपनी आजीविका एवं आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर सकें। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए विशेष अभियान के तहत कार्यवाही पूर्ण की जाएगी। अब तक कुल 68.11 लाख अधिकार अभिलेखों का निर्माण किया गया है। इसमें 48.32 लाख निजी संम्पत्तियां शामिल है। अधिकार अभिलेखों के पंजीयन के लिए नागरिकों से स्टॉम्प ड्यूटी अथवा पंजीयन शुल्क नहीं लिया जाएगा, संपूर्ण व्यय राशि 3800 करोड़ रूपये का वहन राज्य शासन द्वारा किया जाएगा।