तीन साल से बन रहा है ग्वालियर रेलवे स्टेशन, पुनर्विकास कार्य के बीच चरमराई व्यवस्थायें, प्रतिदिन 65 हजार यात्री हो रहे परेशान

ग्वालियर. सड़क से रेलवे स्टेशन के मुख्य द्वार तक पहुंचने के लिये बुजुर्ग और दिव्यांगों को संघर्ष करना पड़ रहा है और निर्माण कंपनी दिनों निर्माण के लिये समय बढ़ा रही है। ऐसे में रेलवे स्टेशन पुनर्विकास कार्य के बीच व्यवस्थायें चरमरा गयी है। इसका सीधा असर प्रतिदिन आने-जाने वाले करीब 65 हजार सफर करने वाले यात्रियों पर पढ़ रहा है। प्लेटफार्म नम्बर 1 के बाहर पुराने पोस्ट ऑफिस के पास जाने वाला मुख्य मार्ग 3 महीने से बेरिकेड्स लगाकर बन्द कर दिया गय है। इस वजह से लगभग 65 हजार यात्रियों को भारी लगेज के साथ लम्बी दूरी तय करनी पड़ रही है। रेलवे स्टेशन का काम भी लेट लतीफ है। इस काम को देखने वाले डिप्टी सीई कंस्ट्रक्शन सुधीर पटेल चुप्पी साधे हुए है। जबकि उत्तरमध्य रेलवे ने मार्च 2026 तक प्लेटफर्मा के ऊपर रूफटॉप का काम पूरा करने के निर्देश दिये थे। लेकिन रेलवे अधिकारी और कंस्ट्रक्शन कम्पनी केपीसी के बीच तालमेल के अभाव में काम की रफ्तार धीमी है। जिसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है।
मिलीभगत का खेल- मुख्य मार्ग पर बेरीकेड्स, पार्किंग का रास्ता खुला
इस पूरे मामले में बड़ा सवाल यही है कि पार्किंग के अंदर से जाने वाला मार्ग खुला है। वहां से वाहन गुजर रहे हैं, जबकि बगल का मुख्य रोड बंद है। यात्रियों का कहना है कि अगर मुख्य मार्ग चालू होता, तो उन्हें इतनी परेशानी नहीं झेलनी पड़ती। यात्रियों ने एसीएम, स्टेशन निदेशक, स्टेशन प्रबंधक और पूछताछ केंद्र तक कई बार मौखिक और शिकायतें दर्ज कराई हैं। आरोप यह भी हैं कि वाणिज्य विभाग के कुछ अधिकारियों और ठेकेदार के बीच मिलीभगत के कारण यह रेलवे स्टेशन पर यह अवैध वसूली खुलेआम हो रही है। यात्रियों के अनुसार, ट्रेन पकड़ने की जल्दबाजी में बैग और सूटकेस लेकर पैदल चलना मजबूरी बन गया है। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चों के साथ यात्रा करने वालों को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है। कई यात्रियों ने इसे “रोज की परेशानी” बताते हुए कहा कि स्टेशन पहुंचना अब आसान नहीं रहा। यात्री देवराज सिंह बताते हैं कि स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब वाहन से आने वाले यात्रियों को मजबूरन पार्किंग एरिया के अंदर से होकर प्लेटफार्म तक जाना पड़ता है। यहां चार पहिया वाहनों से ₹25 और दो पहिया से ₹15 वसूले जा रहे हैं।