हाईकोर्ट की सख्ती से अभ्यर्थी को मिले नियुक्ति देने के आदेश, राज्य शासन को देना होगा 5 लाख रूपये का हर्जाना
ग्वालियर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ की एकल पीठ ने मेडीकल ऑफिसर भर्ती मामले में राज्य शासन को कड़ी फटकार लगाते हुए एक चयनित अभ्यर्थी को तत्काल नियुक्ति देने और 5 लाख रूपये का हर्जाना अदा करने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति आनंद सिंह बहारावत की पीठ ने स्पष्ट कहा है कि विभागीय लापरवाही और अनावश्यक देरी का खामियाजा किसी भी अभ्यर्थी को नहीं भुगतना पड़ेगा। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को मंेडीकल ऑफिसर के पद पर नियुक्त करने और उसे वरिष्ठता और वेतनवृद्धि समेत सभी परिणामों का लाभ देने के निर्देश दिये है। हालांकि ‘‘नो वर्क नो पे’’ सिद्धांत के तहत पिछला वेतन देय नहीं होगा।
हाईकोर्ट ने राज्य शासन को 5 लाख रूपये की लागत राशि अदा करने का भी निर्देश दिया है। यह भी कहा है कि इस राशि की वसूली जिम्मेदार अधिकारियों से की जाये। इसके बलये जांच कर कार्यवाही सुनिश्चित की जाये। हाईकोर्ट ने आदेश के पालन के लिये 3 महीने की समयसीमा तय की है। ़
मेरिट में तीसरा स्थान फिर भी नही मिली नियुक्ति
याचिकाकर्ता सार्थक जुगलान ने वर्ष 2013 में जारी विज्ञापन के अनुसार मेडीकल अधिकारी के पद के लिये आवेदन किया था। चयन प्रक्रिया में उन्होंने मेरिट सूची में तीसरा स्थान प्राप्त किया था। मेडीकल परीक्षण और पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद उन्हें नियुक्ति आदेश जारी नहीं किये गये। जबतकि मेरिट सूची में प्रथम और द्वितीय स्थापन करने वाले अभ्यार्थियों को नियुक्ति दे दी गयी थी।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी और याचिकाकर्ता सभी मानदंडों पर खरा उतरा था, तब नियुक्ति न देना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। ऐसे मामलों में न्यायालय हस्तक्षेप करने से पीछे नहीं हटेगा।