मिलावटी दूध प्रकरण में ग्वालियर हाईकोर्ट सख्त, ट्रिब्यूनल का आदेश रद्द कर पुनः सुनवाई के लिये भेजा
ग्वालियर. मिलावटी दूध से जुड़े एक मामले में ग्वालियर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने फूड सेफ्टी अपीलेट ट्रिब्यूनल के आदेश को निरस्त कर दिया है। हाईकोर्ट ने मामले को पुनः निर्णयन प्राधिकारी के पास भेजते हुए कहा है कि दूध में मिलावट जैसे गंभीर मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता है।न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया ने सुनवाई के बीच में टिप्पणी की कि मिलावटी दूध शिशुओं, बुजुर्गो और आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रस्ताव डालता है। इसलिये ऐसे मामलों में कठोर कार्यवाही आवश्यक है।
क्या है मामला
यह मामला वर्ष 2019 का है, जब खाद्य सुरक्षा विभाग ने पाम ऑयल से मिलावटी दूध बनाने की आशंका पर एफआईआर दर्ज की थी। खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने मुरैना के कैलारस क्षेत्र में प्रदीप नामक व्यक्ति के घर की तलाशी ली थी। तलाशी के दौरान घर के बेसमेंट से 153 सीलबंद टिनों में रिफाइंड पाम ऑयल बरामद हुआ था। प्रदीप ने दावा किया था कि बेसमेंट बंटी नामक व्यक्ति को किराए पर दिया गया था, जो डेयरी का कारोबार करता है। जांच एजेंसियों को आशंका थी कि बरामद पाम ऑयल का उपयोग मिलावटी दूध तैयार करने में किया जाना था। हालांकि जांच के दौरान कोई किरायानामा या खरीद बिल नहीं मिला।
पूर्व में भी लगाया था 4 लाख रूपये का जुर्माना
बरामद ऑयल के सैम्पल जांच में अमानक पाये गये थे और इसकेबाद न्याय निर्णयन अधिकारी (एडीएम मुरैना) ने प्रदीप और बंटी दोनों पर ही 2-2 लाख रूपये का जुर्माना किया था। फूड सेफ्टी अपीलेंट ट्रिब्यूनल ने 28 र्मइी 2024 को यह आदेश रद्द कर दिया था। ट्रिब्यूनल ने कहा था कि सैम्पल 14 दिनों के अन्दर जांच नहीं किये गये थे। डेयरी से कोई सेम्पल नहीं लिया गया और मिलावट का इरादा भी साबित नहीं हुआ था। अब हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के इस फैसले को निरस्त कर मामले को पुनः सुनवाई के लिये भेज दिया है। हाईकोर्ट के इस रूख से मिलावटी खाद्य पदार्थो के मामलों में सख्त कार्यवाही का संदेश माना जा रहा है।
इन बिंदुओं होगी सुनवाई
संबंधित व्यक्ति द्वारा पाम आयल का उपयोग कैसे किया जा रहा था?
संबंधित व्यक्ति वैध व्यापार में था या डेयरी संचालन कर रहा था ?
क्या ग्राम पंचायत द्वारा जारी एनओसी वैध भवन अनुमति थी?
क्या बेसमेंट का उपयोग व्यावसायिक भंडारण के लिए किया जा सकता है।
किरायानामा वास्तव में निष्पादित हुआ था या नहीं?