दंदरौआ धाम भूमि विवाद भिंड कलेक्टर की सेवा पुस्त्किा में आदेश किया गया दर्ज, 2 लाख जुर्माना

ग्वालियर. दंदरौआ धाम भूमि विवाद मामले में ग्वालियर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने राज्य शासन की तरफ 341 दिन की देरी से दायर अपील को गंभीर मानते हुए देरी तो माफ कर दी। लेकिन इसके साथ ही 2 लाख रूपये का जुर्माना भी लगायाहै। यह राशि रेडक्रॉस सोसायटी में जमा कराने के निर्देश दिये गये है। हार्हकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि शासन चाहे तो यह राशि दोषी अधिकारियों से वसूल कर सकता है। हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते ह हुए कहा है कि यह मामला दर्शाता है कि जब न्यायालय गंभीर रूख अपनाता है। तब राज्य शासन अनिच्छा से ही सही अपने तंत्र को सुधारने के लिये कदम उठाता है । कई बार शासनको अपने ही अधिकारियेां की करतूतों का खामियाजा भुगतना पड़ता है।
बहूमूल्य है सरकारी जमीन
हाईकोर्ट ने माना है कि अपील में देरी अत्याधिक है। लेकिन चूंकि मामला बहूमूल्य सरकारी जमीन से जुड़ा है।इसलिये इसे सुना जाना आवश्यक है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही किये जाने से वह संतुष्ट है। शासन की तरफ से हाईकोर्ट को बताया गयाहै कि तत्कालीन तहसीलदार भिंड ने राजस्व अभिलेखों में कथित रूप से फर्जी प्रविष्टि कर 55.43 हैक्टर सरकार भूमि ट्रस्ट के नाम से दर्ज की थी। इस गंभीर अनियमितता पर तहसीलदारको निलंबित करदिया गया है। उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करते हुए चार्जशीट भी जारी की जा चुकी है। यह कार्यवाही हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद की गयी।
पूरा मामला ऐसे समझें
वर्ष 2007 में तहसीलदार भिंड ने दंदरौआ सरकार पब्लिक ट्रस्ट को 46 खसरा नंबरों की कुल 55.43 हेक्टेयर सरकारी भूमि पौधरोपण (प्लांटेशन) के उद्देश्य से पट्टे पर दी थी। इस आवंटन के खिलाफ अपील के बाद कलेक्टर भिंड ने 25 अप्रैल 2011 को लीज निरस्त कर दी। आयुक्त, चंबल संभाग ने भी कलेक्टर के फैसले को बरकरार रखा।
हालांकि 15 जनवरी 2015 को राजस्व मंडल ने कलेक्टर और आयुक्त के आदेश पलटते हुए ट्रस्ट के पक्ष में फैसला दे दिया। इसके बाद शासन ने राजस्व मंडल के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
कोर्ट की दो टूक
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन जनहित से जुड़ी संपत्ति है और अधिकारियों की लापरवाही या फर्जी प्रविष्टियों के कारण राज्य को उसकी कीमत नहीं चुकानी चाहिए। इसी आधार पर कोर्ट ने जुर्माने के साथ देरी माफ करते हुए प्रकरण का निराकरण कर दिया।