जमीन आवंटन के बीच लटका जीवाजी विश्वविद्यालय का मेडीकल कॉलेज
ग्वालियर. मेडीकल कॉलेज खोलने का सपना एक बार फिर फाइलों और फैसलों के बीच लटका हुआ है। जीवाजी विश्वविद्यालय (जेयू) को सीएम ने सैद्धांतिक स्वीकृति मिलने के 6 महीने के बाद भी जेयू को मुरैना में मेडीकल कॉलेज के लिये जमीन उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है। नतीजा यह है कि 500 करोड़ रूपये की लागत से बनने वाला मेडीकल कॉलेज अभी फाइलों में ही अटका हुआ है। जब तक मुरैना में 50 से 70 एकड़ भूमि आवंटित नहीं होती है तब तक मेडीकल कॉलेज खोलने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पायेगी।
उच्च शिक्षा विभाग के एसीएस अनुपम राज ने स्पष्ट किया है कि मेडीकल कॉलेज के लिये जमीन आवंटन की कार्यवाही चल रही है। इस मामले में मुरैना कलेक्टर से जानकारी ली जायेगी। यही जीवाजी विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया है कि जमीन मिलने के बाद ही शासन स्तर पर अगली कार्यवाही संभव हो सकेगी। यह स्थिति तब है जब लम्बे समय से जीवाजी विश्वविद्यालय के मेडीकल कॉलेज के लिये प्रक्रिया लंबित है। पहले ग्वालियर में ही इस मेडीकल कॉलेज को खोलने की पूरी तैयारी हो गयी थी। लेकिन बाद में प्लानिंग बदलकर मुरैना में खोलने की योजना बनी। बस यहीं से राजनीति आड़े आ गयी। नेताओं में होड़ लग गयी कि मेडीकल कॉलेज को ग्वालियर से मुरैना ले जाया गया तो ग्वालियर के नेता भी कहां चुप बैठने वाले थे लगा दिया अडंगा।
जमीन बनी सबसे बड़ी अड़चन
मेडीकल कॉलेज खोलने की कवायद पिछले 5 सालों से ग्वालियर में चल रही थी। जीवाजी विश्वविद्यालय के कैम्पस स्थित परीक्षा भवन को चिन्हित किया था। 2 साल पहले नेशनल मेडीकल कमीशन (एनएमसी) की टीम ने मौके का निरीक्षण किया। लेकिन डीन और फैकल्टी की नियुक्ति नहीं होने की वजह से मामला अटक गया। इस दौरान जब कुलगुरू प्रो. राजकुमार आचार्य ने सीएम मोहन यादव से चर्चा की तो सीएम ने मेडीकल कॉलेज मुरैना में खोलने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी। इसके बादजून 2025 में जीवाजी विश्वविद्यालय ने उच्च शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर मुरैना में 50 से 70 एकड़ भूमि आवंटित करने का आग्रह किया। लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं हो पाया है।
100 सीट के लिए 85 फैकल्टी की आवश्यकता
एनएमसी के नियमों के अनुसार 100 एमबीबीएस सीटों वाले मेडिकल कॉलेज के लिए एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, फार्माकोलॉजी, कम्युनिटी मेडिसिन और फॉरेंसिक मेडिसिन जैसे विभागों का पहले से होना जरूरी है। साथ ही कम से कम 85 फैकल्टी की नियुक्ति अनिवार्य है।
शीतला मंदिर रोड पर नोनेरा गांव के पास 17.454 हेक्टेयर जमीन पहले जेयू को मेडिकल कॉलेज के लिए आवंटित की गई थी। लेकिन जमीन विवाद के चलते मामला कोर्ट में फंस गया और विश्वविद्यालय को वहां से हाथ खींचने पड़े। इसी कारण अब पूरा फोकस मुरैना पर आ गया है। इस कारण मेडिकल कॉलेज का काम अटक गया है।