अंबेडकर फोटो विवाद के मामले में 7.30 घंटे चली सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला
ग्वालियर. फोटो जलाने के बाद डॉ. भीमराव अंबेडकर विवाद में गिरफ्तार एडवोकेट अनिल मिश्रा व उनके 3 साथियों की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर सोमवार को हाईकोर्ट में फिर सुनवाई हुई है। सोमवार की सुबह 10.50 बजे तक लगभग 7 घंटे जज ने दोनों पक्षों को सुना है। दोनों पक्षों ने अपना-अपना पक्ष रखा है। अंबेडकर विवाद को लेकर दोनों ओर के व्यवहार पर न्यायालय नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के एडवोकेट, सरकार की ओर से एडवोकेट व पीडित पक्ष की तरफ से भी वकील बहस में शामिल हुए है। 7 घंटे की सुनवाइ्र होने के बाद भी न्यायामूर्ति जीएस अहलूवालिया ने फैसला सुरक्षित रखा है। अब मंगलवार की शाम तक यह फैसला आ सकता है। अब दोनों पक्ष कानून में विश्वास होने और उनके पक्ष में ही फैसला आने का अनुमान लगा रहे हे।
क्या है मामला
दरअसल, ग्वालियर में बुधवार (31 दिसंबर 2025) को एसपी ऑफिस के सामने डॉ. भीमराव अंबेडकर का पोस्टर जलाया गया था। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था। वीडियो सामने आने के बाद दलित नेता महेंद्र बौद्ध सहित अन्य ने एसएसपी ग्वालियर के सामने शिकायत की थी। साथ ही संविधान निर्माता का पोस्टर जलाने पर दलित समाज के आहत होने का आरोप लगाया था। जिसके बाद ग्वालियर क्राइम ब्रांच में एडवोकेट अनिल मिश्रा सहित 7 लोगों पर मामला दर्ज किया था। मामले में गुरुवार (01 जनवरी 2026) शाम एडवोकेट अनिल मिश्रा सहित चार आरोपियों को मुरैना जाते समय पुरानी छावनी में गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले में काफी हंगामा हुआ था। दिन भर एसएसपी ऑफिस, कलेक्ट्रेट में हंगामा चला था। पुलिस ने शुक्रवार को एडवोकेट अनिल मिश्रा को कोर्ट में पेश किया था पर वहां जमानत नहीं मिल पाई थी और उनको जेल भेज दिया गया था। रविवार को इस मामले में सुनवाई के लिए स्पेशल बेंच ने लगी थी। जस्टिस अहलुवालिया ने सुनवाई के दौरान एससी एसटी एक्ट मामले में कहा था कि पीड़ित को सुनवाई का अधिकार देना अनिवार्य है। इसलिए पीड़ित काे इस याचिका के बारे में अपडेट किया जाए और जानकारी दी जाए। कोर्ट में बात उठी थी कि इसमें जो पीड़ित मकरंद बौद्ध हैं, वह खुद साल 2017 से आईपीसी की धारा 188, 146 के मामले में विश्वविद्यालय थाना से फरार है। उसका गिरफ्तारी वारंट तक जारी हुआ है। इस मामले में नाम उछलने के बाद पुलिस ने बिना देर किए एडवोकेट मिश्रा मामले में फरियादी मकरंद को उसके पूर्व मामले में गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था जहां से उसे जेल भेज दिया गया था।