राफेल डील पर आमने-सामने थे PMO और रक्षा मंत्रालय? थोड़ी देर में राहुल की PC

राफेल डील को लेकर देश में जारी विवाद थमता नहीं दिख रहा है. अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' ने खुलासा किया है कि फ्रांस सरकार के साथ राफेल डील को लेकर रक्षा मंत्रालय की ओर से की जा रही डील के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के दखल का फायदा फ्रांस को मिला था. पीएमओ की इस दखल का रक्षा मंत्रालय ने विरोध भी किया था. अब इसी मीडिया रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस ने फिर मोदी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीधे तौर इसमें हस्तक्षेप किया था.

अंग्रेजी अखबार का कहना है कि 7.87 बिलियन डॉलर के विवादित राफेल डील पर दोनों देशों की ओर से शीर्ष स्तर पर हो रही बातचीत में पीएमओ के 'सामानांतर दखल' का भारतीय रक्षा मंत्रालय ने जमकर विरोध किया था. पीएमओ के 'सामानांतर दखल' के कारण रक्षा मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय की टीम सौदे को लेकर बातचीत कमजोर पड़ गई. 24 नवंबर, 2015 को यह रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के संज्ञान में लाया गया.