IIMC बना अखाड़ा, अमरावती कैंपस के निदेशक के खिलाफ प्रोफेसर ने दर्ज कराई FIR

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन (IIMC) देश का नामी मीडिया इंस्टिट्यूट और भारत सरकार के सूचना प्रसारण मंत्रालय के अधीन स्वायत्त संस्था है. इसका अमरावती कैंपस जंग का अखाड़ा बन गया है. ये जंग किसी और में नहीं बल्कि अमरावती इंस्टिट्यूट के रीजनल डायरेक्टर अनिल कुमार सौमित्र (Anil Kumar Saumitra) और एक प्रोफेसर विनय सोनुले (Vinay Sonule) के बीच छिड़ी है. सौमित्र के खिलाफ दिल्ली मुख्यालय में शिकायत भी की जा चुकी है. अब मामला पुलिस तक पहुंच गया है. असिस्टेंट प्रोफेसर विनय ने प्रो. सौमित्र पर गंभीर आरोप लगाते हुए एससी-एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करा दी है. एफआईआर से कुछ घंटे पहले ही सौमित्र ने विनय की नियुक्ति रद्द कर दी थी.

अनिल कुमार सौमित्र की आईआईएमसी में बतौर प्रोफेसर अक्टूबर 2020 में नियुक्ति हुई थी. इसे पहले वह भारतीय जनता पार्टी के मध्य प्रदेश के प्रवक्ता थे. लेकिन 2019 में उस समय विवादों में घिर गए थे, जब उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट में महात्मा गांधी को फादर ऑफ पाकिस्तान बता दिया था. इसके बाद भाजपा ने मई 2019 में उन्हें प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया था. जब अनिल सौमित्र 2013 में मध्य प्रदेश में बीजेपी के मुखपत्र चरैवेति के संपादक थे, तब भी एक लेख को लेकर खूब बवाल हुआ था. ‘चर्च के नरक में नन का जीवन’ हेडलाइन से पत्रिका में छपे लेख में कैथलिक चर्च में ननों के कथित यौन शोषण के बारे में लिखा गया था.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक प्रो. विनय सोनुले ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में सौमित्र पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका आरोप है कि खास जाति से संबंध रखने के कारण उन्हें टारगेट किया जा रहा है. यह सब जुलाई 2021 से ही चल रहा है. इंस्टिट्यूट में आयोजित एक समारोह के दौरान उन्हें सबके सामने बेइज्जत किया गया. छात्रों और स्टाफ के सामने जलील किया गया. ऐन परीक्षा के दिन उन्हें एग्जाम इंचार्ज के पद से हटा दिया गया. उन्हें क्लास में पढ़ाने नहीं दिया जा रहा है. यहां तक कि प्रिंटर और ईमेल जैसी सुविधाओं से भी वंचित कर दिया गया है.

प्रो. विनय का आरोप है कि यह सब इसलिए हुआ कि उन्होंने सौमित्र के खिलाफ दिल्ली में आईआईएमसी मुख्यालय में शिकायत कर दी थी. 16 फरवरी को भी फ्रेजरपुरा पुलिस थाने में सौमित्र के खिलाफ लिखित शिकायत दे चुके प्रो. विनय ने बताया कि संस्थान में उनकी कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्ति हुई थी. जिसे रीजनल डायरेक्टर सौमित्र ने रद्द कर दिया है. इसका ईमेल उन्हें सोमवार सुबह मिला. प्रो. विनय ने दावा किया सौमित्र को किसी प्रोफेसर की नियुक्ति रद्द करने का अधिकार नहीं है क्योंकि उनकी तैनाती दिल्ली मुख्यालय से होती है. ऐसे में कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने का अधिकार भी दिल्ली हेडऑफिस को है.

इस मामले को लेकर डीसीपी एमएम मकानदार ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि हमने एफआईआर दर्ज कर ली है. जांच की जा रही है. छानबीन के बाद उचित कदम उठाया जाएगा. अभी किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्होंने प्रो. सौमित्र से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया. आईआईएमसी के महानिदेशक संजय द्विवेदी ने कहा कि वो इस समय यात्रा कर रहे हैं, इसलिए उन्हें पूरे मामले की जानकारी नहीं है. ऑफिस पहुंचने के बाद ही वह इस बारे में कुछ बता पाएंगे.