Sunanda Pushkar Death case: AIIMS की जिस रिपोर्ट ने पहले उठाए थे सवाल, वहीं थरूर के लिए बनी निर्णायक

नई दिल्ली. दिल्ली की एक अदालत ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर को उनकी पत्नी सुनंदा पुष्कर की मौत (Sunanda Pushkar Death case) के मामले में आरोपों से बरी कर दिया है. सुनंदा की मौत करीब 7 साल पहले दिल्ली के एक होटल में हुई थी. विशेष न्यायाधीश गीतांजलि गोयल ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिए सुनवाई करते हुए ये फैसला सुनाया. कहा जा रहा है कि AIIMS की ऑटोप्सी रिपोर्ट के आधार पर ही थरुर को बरी किया गया. सुनंदा पुष्कर की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने शुरुआत में जवाब से ज्यादा कई सवाल खड़े किए थे. शुरुआती रिपोर्ट में कहा था कि उनकी मौत नेचुलर नहीं थी, लेकिन ये कभी साफ नहीं किया गया कि इसका क्या मतलब है.

ये एक एसडीएम जांच थी, लिहाजा एम्स के तत्कालीन निदेशक डॉक्टर एमसी मिश्रा ने पोस्टमार्टम करने के लिए डॉक्टर सुधीर गुप्ता की अध्यक्षता में फोरेंसिक विशेषज्ञों के तीन सदस्यीय पैनल का गठन किया था. प्रोटोकॉल के तहत पूरी ऑटोप्सी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की गई. एम्स में पुष्कर के शव परीक्षण के दो दिन बाद, अस्पताल ने एक सीलबंद लिफाफे में तत्कालीन उप-विभागीय मजिस्ट्रेट आलोक शर्मा को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी.

रिपोर्ट पर कई सवाल

रिपोर्ट में कहा गया कि ऐसा लग रहा है कि पुष्कर की मौत प्राकृतिक कारणों से नहीं बल्कि जहर के कारण हुई थी. वकील अतुल श्रीवास्तव ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर ये तर्क दिया कि ये आकस्मिक मृत्यु नहीं थी, बल्कि जहर से ये मौत हुई, जिसे इंजेक्शन के जरिए डाला गया. डॉ गुप्ता ने बुधवार को कहा, ‘पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट सौंपने के बाद, हमारा काम खत्म हो गया था. जब तक अदालत के पास कुछ खास सवाल न हों, अदालत को अपनी राय देने के लिए फोरेंसिक के पास कोई कानूनी प्रावधान नहीं है.’ हालांकि, डॉक्टरों ने बाद में ये भी स्पष्ट किया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कभी भी ये उल्लेख नहीं किया गया था कि ये एक ‘हत्या’ थी, और जांच एजेंसियों को ये पता लगाना चाहिए था कि जहर का तरीका क्या था और किस पदार्थ का इस्तेमाल किया गया था.

फोरेंसिक एक्सपर्ट्स की ज़िम्मेदारी

डॉक्टर गुप्ता ने आगे कहा, ‘सुनंदा पुष्कर मौत मामला, चाहे हत्या हो या आत्महत्या या दुर्घटना, ये हमेशा जांच एजेंसी को निर्धारित करना है. फोरेंसिक मेडिसिन विशेषज्ञ संभावित कारणों का पता लगाने के लिए हैं, जो जांचकर्ताओं की मदद कर सकते हैं.’

यूएस फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने क्या कहा

पुष्कर के विसरा के नमूने (आंतरिक अंग) जहर के प्रकार को निर्धारित करने के लिए यूएस फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन प्रयोगशाला भेजे गए, क्योंकि एम्स की रिपोर्ट में किसी विशिष्ट पदार्थ का उल्लेख नहीं था. 11 पन्नों की एफबीआई रिपोर्ट में एम्स के निष्कर्षों की पुष्टि करने वाली एक Anti-Anxiety दवा के निशान मिले. एल्प्रैक्स के निशान के अलावा, एफबीआई लैब को एक एनेस्थेटिक ड्रग ‘लिडोकेन जेल’ भी मिली, जिसका इस्तेमाल त्वचा की सूजन के कारण होने वाली खुजली, जलन और दर्द से राहत के लिए किया जाता है.